भक्ति काल और सामाजिक सुधार
संत रविदास स्वामी रामानंद के
प्रमुख शिष्यों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने अपने दोहों और पदों के माध्यम
से समाज में व्याप्त जाति-पाति, ऊँच-नीच और धार्मिक पाखंड का
कड़ा विरोध किया। उनका मानना था कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं। उनके
विचारों ने समाज के उपेक्षित और वंचित वर्गों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाया।
प्रमुख शिक्षाएँ और 'बेगमपुरा' की कल्पना
उनकी आध्यात्मिक विचारधारा का
मुख्य केंद्रबिंदु 'मन चंगा तो कठौती में गंगा' था, जिसका अर्थ है कि यदि आपका मन पवित्र है, तो सबसे पवित्र गंगा नदी आपके हृदय में ही निवास करती है।
उन्होंने 'बेगमपुरा' (बिना गम या दुःख का शहर) नामक
एक आदर्श, समतावादी समाज की परिकल्पना की, जहाँ कोई भेदभाव, कर, या