1. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
नृत्य: ज़ोंग और सेंटिनेली डांस
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आदिवासी समुद्री जीवन, शिकार और अनुष्ठानों को दर्शाते हैं।
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लकड़ी की ड्रम, पत्तियों और समुद्री सीपियों का संगीत।
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उत्सव: हलचल और खुशियों के समय जैसे “पोखरि” त्योहार में प्रदर्शन।
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पोशाक: समुद्री जीवन के प्रतीक रंग और सजावट।
2. आंध्र प्रदेश
नृत्य: कुचिपुड़ी
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कथात्मक नृत्य, रामायण, महाभारत और कृष्ण लीला आधारित।
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विशेषता: लक्ष्यपूर्ण आँखों की मुद्राएँ, तेज़ पैर की चाल, अभिनय और कथन।
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वाद्य: ढोल, मृदंगम, ताल।
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पोशाक: पारंपरिक चमकीले रंग की साड़ी, मुकुट और गहने।
इतिहास:
कुचिपुड़ी लगभग 400 साल पुराना नृत्य है, जिसे मंदिरों में पूजा और भक्ति हेतु प्रस्तुत किया जाता था।
3. अरुणाचल प्रदेश
नृत्य: हॉनी हंटिंग और वांगला
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आदिवासी शिकार और कृषि से जुड़ी कथाएँ।
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उत्सव: हनी हंटिंग सीजन और बौद्ध उत्सव।
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वाद्य: ढोलक, ड्रम, बांसुरी।
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पोशाक: चमकीले और पंख वाले हेडगियर, रंगीन कपड़े।
4. असम
नृत्य: भूटिया बियू (Bihu Dance)
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नव वर्ष और फसल उत्सव पर आधारित।
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कदम: तेज़ और ऊर्जावान।
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वाद्य: ढोल, पिपा, टुआइ।
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पोशाक: महिलाएं रंग-बिरंगे मखमली साड़ी और पुरुष धोती, झुमका।
इतिहास:
भांगड़ा के समान, भूटिया और असमिया समुदाय के लोग इसे उत्साह और प्रेम भाव दर्शाने के लिए करते हैं।
5. बिहार
नृत्य: झुमर, बिदेसिया, समहली
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कृषि जीवन और त्योहार पर आधारित।
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सामूहिक प्रदर्शन, सामंजस्यपूर्ण कदम।
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वाद्य: ढोलक, मंजीरा।
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पोशाक: महिलाएं पारंपरिक साड़ी, पुरुष धोती और टोप।
कथा:
झुमर में प्रेम और नारीत्व का सुंदर चित्रण देखने को मिलता है।
6. छत्तीसगढ़
नृत्य: राउत नाचा और करमा
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राउत नाचा: गोपाल (गाय पालन) समुदाय के लोग प्रस्तुत करते हैं।
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करमा: कृषि उत्सव पर आधारित।
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वाद्य: ढोलक, मंजीरा।
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पोशाक: चमकीले रंग और मुखौटे।
विशेषता:
इन नृत्यों में संगीत और कथा का सुंदर मिश्रण है।
7. गोवा
नृत्य: फाडो, डुंडाल
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पुर्तगाली प्रभाव के कारण संगीत और नृत्य में विशिष्ट रंग।
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उत्सव: उत्सव, शादी और धार्मिक उत्सव।
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पोशाक: रंगीन और समुद्री शैली।
8. गुजरात
नृत्य: गरबा और डांडिया
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नवरात्रि में देवी दुर्गा की आराधना।
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कदम: गोलाकार घूमना और ताल के अनुसार डांडिया का प्रयोग।
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पोशाक: घाघरा-चोली और पुरुष कुर्ता।
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वाद्य: ढोल, झांझ।
इतिहास:
गरबा का अर्थ है ‘गर्भ’ यानी देवी के गर्भ का प्रतीक। इसे भक्ति और जश्न के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
9. हरियाणा
नृत्य: सांगीतिक सैंग/ढमाल
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विवाह और त्योहारों में प्रदर्शन।
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वाद्य: ढोलक, ड्रम।
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पोशाक: पारंपरिक धोती, चोली।
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कथा आधारित, हास्य और सामाजिक संदेश।
10. हिमाचल प्रदेश
नृत्य: किन्नौर, लहमर
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पर्वतीय जीवन, कृषि और देवी-देवता पर आधारित।
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वाद्य: ढोलक, रबर की मंजीरा।
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पोशाक: ऊनी कपड़े और टोपी।
11. झारखंड
नृत्य: चौखुरी और पांखो
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आदिवासी समुदाय का मुख्य नृत्य।
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युद्ध, शिकार और कृषि जीवन को दर्शाता है।
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वाद्य: ढोलक, ताशा, नगाड़ा।
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मुखौटा और सामूहिक प्रदर्शन।
12. कर्नाटक
नृत्य: यक्षगान
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महाभारत, रामायण और लोककथाओं पर आधारित।
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मुखौटा, रंगीन पोशाक।
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वाद्य: ढोल, मृदंग, ताल।
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थिएटर और अभिनय का मिश्रण।
13. केरला
नृत्य: कथकली और मोहिनीअट्टम
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कथकली: भगवान और दानवों की कहानियां, मुखौटा और विस्तृत श्रृंगार।
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मोहिनीअट्टम: देवियों का सौंदर्य और कोमल भाव।
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वाद्य: ढोल, शंख, शहनाई।
14. मध्य प्रदेश
नृत्य: सोंघनी और गेरो
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आदिवासी समुदाय का उत्सव।
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सामूहिक कदम और ताल।
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पोशाक: रंग-बिरंगे और सजावटी।
15. महाराष्ट्र
नृत्य: लावणी और कोंकणी फोक
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लावणी: तेज़ और प्रेम भाव।
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वाद्य: ढोल, ताशा।
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पोशाक: पारंपरिक साड़ी और गहने।
16. मणिपुर
नृत्य: रास लीला और पथचरी
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भगवान कृष्ण और राधा की लीला।
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धीमे, कोमल कदम।
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पोशाक: लंबी स्कर्ट और पारंपरिक आभूषण।
17. मेघालय
नृत्य: शैरा और नॉनसोनी
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बारिश और फसल उत्सव।
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वाद्य: ढोलक, बांसुरी।
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पोशाक: रंग-बिरंगे और सामूहिक।
18. मिजोरम
नृत्य: चीफा / बांस नृत्य
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बांस की छड़ियों के बीच सामूहिक नृत्य।
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सामंजस्यपूर्ण कदम।
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उत्सव: Chapchar Kut।
19. नागालैंड
नृत्य: नगा ट्राइबल डांस
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शिकार, युद्ध और उत्सव।
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मुखौटा और रंग-बिरंगे पोशाक।
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सामूहिक और तालपूर्ण प्रदर्शन।
20. ओडिशा
नृत्य: ओडिसी
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भगवान जगन्नाथ की कथाओं पर आधारित।
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धीमे और भावपूर्ण कदम।
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पोशाक: साड़ी, अंगूठियां, झुमके।
21. पंजाब
नृत्य: भांगड़ा और गिद्दा
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उत्सव, फसल, और शादी में।
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तेज़ और ऊर्जावान कदम।
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वाद्य: ढोल।
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पोशाक: पुरुष पगड़ी और महिलाएं सलवार-कुर्ता।
22. राजस्थान
नृत्य: घूमर और कालबेलिया
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घूमर: महिलाओं का गोल-गोल घूमने वाला नृत्य।
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कालबेलिया: सांप पकड़ने वालों की जीवन शैली।
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पोशाक: रंग-बिरंगे कपड़े और गहने।
23. सिक्किम
नृत्य: लोपा और गॉरखाली
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बौद्ध धर्म और प्रकृति।
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मुखौटे और सामूहिक।
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वाद्य: ढोल, बांसुरी।
24. तमिलनाडु
नृत्य: भरतनाट्यम
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भगवान शिव के नटराज रूप और कथाओं पर आधारित।
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हाथ और आँखों के भाव अत्यंत महत्वपूर्ण।
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पोशाक: रंगीन साड़ी और गहने।
25. तेलंगाना
नृत्य: पल्लकु डांस और पोथरी
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देवता और त्योहार आधारित।
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सामूहिक और तेज़ कदम।
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पोशाक: पारंपरिक रंग।
26. त्रिपुरा
नृत्य: होजांग और रिखांग
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आदिवासी जीवन और कृषि।
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सामूहिक प्रदर्शन और रंग-बिरंगे पोशाक।
27. उत्तर प्रदेश
नृत्य: रामलीला, ठुमरी और चौपाई नृत्य
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धार्मिक कथाएँ और प्रेम भाव।
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माटी के मंच, पारंपरिक पोशाक।
28. उत्तराखंड
नृत्य: चोलिया और झूमर
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युद्ध और उत्सव आधारित।
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वाद्य: ढोल, शहनाई।
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तलवार का प्रयोग भी।
29. पश्चिम बंगाल
नृत्य: चौखोला, धोपा और चाऊ नृत्य (Chhau Dance)
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युद्ध, देवी-देवता और लोककथाएँ।
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मुखौटा और रंगीन पोशाक।
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सामूहिक और उत्साही।
✨ निष्कर्ष – विस्तृत
भारत के नृत्य:
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उत्तर भारत: ऊर्जावान, युद्ध/कृषि आधारित।
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दक्षिण भारत: कथात्मक, धार्मिक और शास्त्रीय।
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पूर्वोत्तर: आदिवासी और प्रकृति आधारित।
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पश्चिम भारत: उत्सव और सामूहिक आनंद।
हर नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति, धर्म और जीवन शैली का प्रतिबिंब है।

