1. परिचय
इंडस वैली सभ्यता, जिसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, प्राचीन विश्व की सबसे विकसित और व्यवस्थित सभ्यताओं में से एक थी। यह सभ्यता लगभग 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व तक फलती-फूलती रही।
इंडस वैली सभ्यता मुख्य रूप से आज के पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत के क्षेत्र में स्थित थी। इसकी प्रमुख नगरीयाँ थीं:
-
हड़प्पा
-
मोहनजोदड़ो
-
धोलावीरा
यह सभ्यता शहरी नियोजन, जलप्रबंधन, और व्यापार में अत्यंत विकसित थी।
2. सभ्यता का इतिहास
इंडस वैली सभ्यता की शुरुआत लगभग सिन्धु नदी घाटी के आसपास हुई।
प्रारंभिक चरण (3300–2600 ईसा पूर्व)
-
इस दौरान छोटी-छोटी बस्तियाँ बनीं।
-
कृषि का विकास हुआ: गेहूँ, जौ, और तिलहन की खेती।
-
पशुपालन: गाय, भैंस और भेड़।
शहरीकरण का चरण (2600–1900 ईसा पूर्व)
-
नगर नियोजन और ईंटों की बस्तियाँ।
-
सड़कों का जाल, नालियाँ और जल प्रबंधन प्रणाली।
-
कला और हस्तकला में सुधार।
पतन का चरण (1900–1300 ईसा पूर्व)
-
कुछ कारणों से नगर धीरे-धीरे खाली हुए।
-
संभव कारण: जलवायु परिवर्तन, बाढ़, आर्थिक संकट।
3. प्रमुख नगरीयाँ
हड़प्पा
-
पहचानी गई पहली शहर सभ्यता।
-
किले और बस्ती का निर्माण।
-
प्रशासनिक केंद्र और व्यापारिक हब।
मोहनजोदड़ो
-
330 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली।
-
शहर की योजना ग्रिड पद्धति पर आधारित।
-
विशाल सार्वजनिक स्नानागार (Great Bath)।
-
ईंटों की मजबूत इमारतें।
धोलावीरा
-
पश्चिमी भारत में स्थित।
-
जल संचयन और टैंक निर्माण में अग्रणी।
-
नागरिकों के लिए व्यवस्थित जल वितरण प्रणाली।
4. नगर नियोजन और वास्तुकला
इंडस वैली नगरीय जीवन का सबसे बड़ा रहस्य शहर योजना थी:
-
सड़कें पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण में व्यवस्थित।
-
घरों में जल निकासी और शौचालय प्रणाली।
-
बाजार, भंडार और सार्वजनिक भवन।
-
ईंटें मानकीकृत आकार की।
जल प्रबंधन
-
घरों में स्नानघर और शौचालय।
-
शहरों में नालियाँ और सीवेज सिस्टम।
-
जलाशय और कुंड।
5. सामाजिक और आर्थिक जीवन
सामाजिक संगठन
-
इंडस वैली के लोग एकजुट और व्यवस्थित थे।
-
श्रम और व्यापार पर आधारित समाज।
-
कोई स्पष्ट राजा या सेना का सबूत नहीं मिला।
व्यापार
-
व्यापार समुद्री और नदी मार्गों से।
-
सामान: कपास, मोती, धातु, मिट्टी के बर्तन।
-
मेसोपोटामिया और अन्य सभ्यताओं के साथ संपर्क।
6. कला, शिल्प और संस्कृति
-
सिरेमिक कला और मृद्भांड।
-
मूर्तिकला और मुहरें (Seals) में पशु और देवताओं का चित्रण।
-
गहने और आभूषण, सोना, चांदी और तांबे के।
भाषा और लिपि
-
इंडस लिपि: अभी तक पूरी तरह से पढ़ी नहीं गई।
-
व्यापार और प्रशासनिक कार्यों में इस्तेमाल।
7. विज्ञान और तकनीकी ज्ञान
-
माप और मानकीकरण: ईंटों और लंबाई का मानकीकृत माप।
-
खगोल और कैलेंडर: कृषि और त्योहारों के लिए।
-
जल प्रबंधन तकनीक: कुंड, नहरें, टैंक।
8. धर्म और विश्वास
-
प्राकृतिक तत्वों और देवी-देवताओं की पूजा।
-
पशु पवित्र और कृषि आधारित रीति-रिवाज।
-
संभवतः मातृ देवी और उर्वरता पूजा।
9. सभ्यता का पतन
इंडस वैली सभ्यता का पतन अभी भी रहस्यमय है।
संभावित कारण
-
जलवायु परिवर्तन: सूखा और बाढ़।
-
भूगर्भीय बदलाव: नदियों का मार्ग बदलना।
-
आर्थिक और सामाजिक संकट: व्यापार में गिरावट।
-
आक्रमण: संभवतः आंतरिक संघर्ष और बाहरी आक्रमण।
पतन के बाद लोग छोटे गांवों में बिखर गए और सिंधु सभ्यता धीरे-धीरे समाप्त हो गई।
10. आधुनिक खोज और महत्व
-
1920 और 1930 के दशक में आर. डी. बैनरजीन, कुनी बंधु शोधकर्ता और अन्य पुरातत्वविदों ने खोज की।
-
मोहनजोदड़ो और हड़प्पा आज UNESCO की विश्व धरोहर में शामिल।
-
आधुनिक विज्ञान और पुरातत्त्व अध्ययन का आधार।
वैश्विक योगदान
-
नगर नियोजन और जल प्रबंधन का आदर्श।
-
शहरी जीवन, कला, व्यापार और संस्कृति के लिए आदर्श।
-
आज भी आधुनिक नगरों के लिए प्रेरणा।
11. निष्कर्ष
इंडस वैली सभ्यता एक प्राचीन महानगरीय संस्कृति थी, जिसमें विज्ञान, कला, व्यापार और समाज की उच्चतम समझ दिखाई देती है।
-
नगर नियोजन और जल प्रबंधन अद्वितीय।
-
व्यापार और सामाजिक संगठन बेहद विकसित।
-
पतन के बावजूद, इसकी खोज ने मानव इतिहास को उजागर किया।
इंडस वैली सभ्यता हमें यह सिखाती है कि मानव बुद्धिमत्ता, सामाजिक सहयोग और विज्ञान कैसे जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
