संसद किसी भी लोकतांत्रिक देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्था होती है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहाँ शासन की शक्ति जनता के पास होती है। जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर संसद में भेजती है, ताकि वे देश के लिए कानून बनाएँ, सरकार के कार्यों पर नियंत्रण रखें और जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुँचाएँ। भारत की संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जो कानून बनाने, संशोधन करने और देश के प्रशासन को दिशा देने का कार्य करती है।
संसद का अर्थ
“संसद” शब्द संस्कृत के “सम् + सद्” से बना है, जिसका अर्थ है – एक साथ बैठना या विचार-विमर्श करना। अर्थात संसद वह स्थान है जहाँ देश के चुने हुए प्रतिनिधि एकत्र होकर राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं और निर्णय लेते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Parliament कहा जाता है।
भारत की संसद का परिचय
भारत की संसद का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 में किया गया है। इसके अनुसार भारत की संसद तीन अंगों से मिलकर बनी है:
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राष्ट्रपति
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लोकसभा
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राज्यसभा
हालाँकि राष्ट्रपति संसद का सदस्य नहीं होता, फिर भी उसे संसद का अभिन्न अंग माना गया है, क्योंकि संसद द्वारा पारित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बिना कानून नहीं बन सकता।
संसद के अंग
1. राष्ट्रपति
राष्ट्रपति भारत का संवैधानिक प्रमुख होता है। संसद की कार्यवाही राष्ट्रपति के नाम पर होती है। राष्ट्रपति संसद के सत्र को बुलाता है, स्थगित करता है और दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयकों पर अपनी स्वीकृति देता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही कोई विधेयक कानून का रूप लेता है।
2. लोकसभा
लोकसभा को निम्न सदन या जनता का सदन कहा जाता है। इसके सदस्य प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा चुने जाते हैं।
लोकसभा की विशेषताएँ:
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वर्तमान में लोकसभा के अधिकतम सदस्य 543 हैं
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प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 5 वर्ष होता है
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लोकसभा का नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) करता है
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लोकसभा में जनता से जुड़े मुद्दों पर सबसे अधिक चर्चा होती है
लोकसभा का सबसे महत्वपूर्ण कार्य सरकार का गठन करना है। जिस दल या गठबंधन के पास लोकसभा में बहुमत होता है, वही सरकार बनाता है और उसका नेता प्रधानमंत्री बनता है।
3. राज्यसभा
राज्यसभा को उच्च सदन या राज्यों का सदन कहा जाता है। इसके सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
राज्यसभा की विशेषताएँ:
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राज्यसभा के अधिकतम सदस्य 250 हो सकते हैं
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इसमें से 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आते हैं
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12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं
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राज्यसभा एक स्थायी सदन है, यह कभी भंग नहीं होती
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प्रत्येक सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष होता है
राज्यसभा का मुख्य उद्देश्य राज्यों के हितों की रक्षा करना और लोकसभा द्वारा बनाए गए कानूनों की समीक्षा करना है।
संसद के कार्य
भारत की संसद अनेक महत्वपूर्ण कार्य करती है। ये कार्य लोकतंत्र की नींव को मजबूत करते हैं।
1. कानून बनाना
संसद का सबसे प्रमुख कार्य कानून बनाना है। देश में किसी भी नए कानून को लागू करने या पुराने कानून में संशोधन करने का अधिकार संसद को होता है। विधेयक पहले लोकसभा या राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाता है। दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद वह कानून बन जाता है।
2. वित्तीय नियंत्रण
संसद देश के वित्त पर पूर्ण नियंत्रण रखती है। सरकार का वार्षिक बजट संसद में प्रस्तुत किया जाता है। संसद की अनुमति के बिना सरकार कोई कर नहीं लगा सकती और न ही जनता के पैसे को खर्च कर सकती है।
3. कार्यपालिका पर नियंत्रण
संसद सरकार के कार्यों पर निगरानी रखती है। प्रश्नकाल, शून्यकाल, अविश्वास प्रस्ताव और चर्चा के माध्यम से सांसद सरकार से सवाल पूछते हैं और जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं।
4. संविधान में संशोधन
भारतीय संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार प्राप्त है। हालाँकि इसके लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है और कुछ मामलों में राज्यों की सहमति भी आवश्यक होती है।
5. राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा
देश की आंतरिक और बाहरी समस्याओं, जैसे सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विदेश नीति पर संसद में चर्चा होती है। इससे सरकार को सही दिशा में निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
संसद की कार्यवाही
संसद की कार्यवाही वर्ष में कई सत्रों में होती है:
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बजट सत्र
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मानसून सत्र
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शीतकालीन सत्र
इन सत्रों के दौरान सांसद विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं, प्रश्न पूछते हैं और विधेयकों पर बहस करते हैं।
संसद का महत्व
लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। संसद:
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जनता की आवाज़ सरकार तक पहुँचाती है
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सरकार को निरंकुश होने से रोकती है
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देश को एकता और अखंडता प्रदान करती है
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संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करती है
संसद के बिना लोकतंत्र की कल्पना करना संभव नहीं है।
संसद भवन
भारत का संसद भवन नई दिल्ली में स्थित है। यह एक ऐतिहासिक और भव्य इमारत है। हाल ही में नया संसद भवन भी बनाया गया है, जो आधुनिक सुविधाओं से युक्त है और भारत की लोकतांत्रिक शक्ति का प्रतीक है।
निष्कर्ष
संसद भारत के लोकतंत्र की आत्मा है। यह वह मंच है जहाँ जनता के प्रतिनिधि देश के भविष्य का निर्माण करते हैं। संसद न केवल कानून बनाने वाली संस्था है, बल्कि यह सरकार और जनता के बीच एक सेतु का काम भी करती है। एक मजबूत, सक्रिय और जिम्मेदार संसद ही देश को प्रगति और विकास के मार्ग पर ले जा सकती है। इसलिए संसद का सम्मान करना और उसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।