🗳️ क्या चुनाव निष्पक्ष होता है? ( BY - PRAVEEN PRAJAPATI )

 


प्रस्तावना

लोकतंत्र की आत्मा चुनाव में निहित होती है। लोकतंत्र का अर्थ है जनता द्वारा चुनी गई सरकार। जब नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करके प्रतिनिधियों का चयन करते हैं, तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है। किंतु एक महत्वपूर्ण प्रश्न अक्सर चर्चा में रहता है—क्या चुनाव वास्तव में निष्पक्ष होते हैं?

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहाँ चुनाव प्रक्रिया का संचालन भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है। यह एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। फिर भी समय-समय पर चुनाव की निष्पक्षता को लेकर बहस होती रही है। इस निबंध में हम चुनाव की निष्पक्षता के पक्ष और विपक्ष दोनों पहलुओं पर विस्तार से विचार करेंगे।

1. निष्पक्ष चुनाव का अर्थ

निष्पक्ष चुनाव वह होता है जिसमें—

  • सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिले

  • मतदाता बिना किसी दबाव, भय या प्रलोभन के मतदान कर सके

  • प्रशासन और सरकार तटस्थ रहें

  • चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी हो

  • परिणाम सही और सत्यापित हों

यदि चुनाव में किसी प्रकार का पक्षपात, धांधली, धनबल या बाहुबल का प्रयोग होता है, तो उसकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।

2. भारत में चुनाव व्यवस्था की संरचना

भारत में चुनाव प्रक्रिया अत्यंत विस्तृत और संगठित है। भारतीय निर्वाचन आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत किया गया है। यह लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभाओं और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति के चुनाव कराता है।

चुनाव की मुख्य विशेषताएँ:

  1. मतदाता सूची का निर्माण

  2. प्रत्याशियों का नामांकन

  3. आचार संहिता का पालन

  4. मतदान की प्रक्रिया

  5. मतगणना और परिणाम घोषणा

मतदान के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और VVPAT प्रणाली का उपयोग किया जाता है।


EVM के माध्यम से मतदान प्रक्रिया तेज और सरल हुई है। VVPAT पर्ची से मतदाता यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया है।

3. चुनाव की निष्पक्षता के पक्ष में तर्क

(क) स्वतंत्र निर्वाचन आयोग

भारतीय निर्वाचन आयोग सरकार से स्वतंत्र होकर कार्य करता है। चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू हो जाती है, जिससे सत्ता पक्ष नई योजनाओं की घोषणा नहीं कर सकता।

(ख) सुरक्षा व्यवस्था

मतदान केंद्रों पर पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए जाते हैं। इससे हिंसा और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रहता है।

(ग) न्यायिक निगरानी

यदि किसी उम्मीदवार या दल को चुनाव परिणाम पर संदेह हो, तो वह न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।

(घ) पारदर्शिता और तकनीकी सुधार

EVM और VVPAT जैसी तकनीक ने चुनाव को अधिक पारदर्शी बनाया है।

4. चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्न

हालाँकि व्यवस्था मजबूत है, फिर भी कुछ समस्याएँ सामने आती हैं—

(क) धनबल का प्रभाव

चुनाव प्रचार में भारी धन खर्च होता है। बड़े दल अधिक संसाधनों के कारण ज्यादा प्रचार कर पाते हैं, जिससे समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित होता है।

(ख) बाहुबल और दबाव

कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं को धमकाने या प्रलोभन देने की घटनाएँ होती हैं।

(ग) मीडिया और सोशल मीडिया का प्रभाव

मीडिया का पक्षपात या फर्जी खबरें मतदाताओं को प्रभावित कर सकती हैं।

(घ) जाति और धर्म की राजनीति

कई बार चुनाव जातीय या धार्मिक आधार पर लड़े जाते हैं, जिससे निष्पक्ष विचारधारा प्रभावित होती है।

5. EVM पर विवाद

कई राजनीतिक दल समय-समय पर EVM की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाते रहे हैं। हालांकि भारतीय निर्वाचन आयोग का दावा है कि मशीनें सुरक्षित हैं और उनमें छेड़छाड़ संभव नहीं है। VVPAT पर्चियों की मिलान प्रक्रिया भी पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।

फिर भी, तकनीकी प्रणाली होने के कारण जनता के मन में संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक है। इसलिए समय-समय पर तकनीकी जांच और सुधार आवश्यक हैं।

6. अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

यदि हम अन्य लोकतांत्रिक देशों की तुलना करें—

  • संयुक्त राज्य अमेरिका में चुनाव राज्य सरकारों द्वारा संचालित होते हैं।

  • यूनाइटेड किंगडम में बैलेट पेपर प्रणाली अपनाई जाती है।

भारत में केंद्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र आयोग द्वारा पूरे देश में एक समान प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो इसे विशेष बनाती है।

7. सुधार की आवश्यकता

निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए निम्न सुधार आवश्यक हैं—

  1. चुनावी चंदे में पारदर्शिता

  2. आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों पर प्रतिबंध

  3. चुनाव खर्च की सीमा का सख्ती से पालन

  4. फर्जी खबरों पर कानूनी नियंत्रण

  5. मतदाता जागरूकता अभियान

8. नागरिकों की भूमिका

चुनाव की निष्पक्षता केवल संस्थाओं पर निर्भर नहीं करती, बल्कि नागरिकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है—

  • मतदान अवश्य करें

  • रिश्वत या लालच को अस्वीकार करें

  • जाति-धर्म से ऊपर उठकर मतदान करें

  • सही जानकारी प्राप्त करें

जब मतदाता जागरूक होगा, तब चुनाव अधिक निष्पक्ष होंगे।

9. निष्कर्ष

समग्र रूप से कहा जा सकता है कि भारत में चुनाव प्रणाली काफी हद तक निष्पक्ष है। भारतीय निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता, मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था और तकनीकी सुधारों ने चुनावों को विश्वसनीय बनाया है।

फिर भी धनबल, बाहुबल, मीडिया प्रभाव और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं। इसलिए यह कहना उचित होगा कि चुनाव पूर्णतः नहीं, बल्कि अधिकांशतः निष्पक्ष होते हैं, और उन्हें और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के लिए निरंतर सुधार आवश्यक है।

लोकतंत्र की सफलता चुनाव की निष्पक्षता पर निर्भर करती है। जब चुनाव निष्पक्ष होंगे, तभी जनता का विश्वास मजबूत होगा और लोकतंत्र सुदृढ़ बनेगा।

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