इटली का एकीकरण 19वीं शताब्दी की एक महान ऐतिहासिक घटना थी। इसे इटली में “Risorgimento” कहा जाता है, जिसका अर्थ है – पुनर्जागरण या पुनरुत्थान। यह केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय भावना, क्रांति, कूटनीति और युद्धों का लंबा संघर्ष था। लगभग 1815 से 1871 तक चली इस प्रक्रिया ने इटली को छोटे-छोटे राज्यों से निकालकर एक शक्तिशाली राष्ट्र बना दिया।
🔹 एकीकरण से पहले इटली की स्थिति
1815 में Congress of Vienna के बाद यूरोप का नक्शा दोबारा बनाया गया। इटली को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी गई, बल्कि उसे कई छोटे राज्यों में बाँट दिया गया। मुख्य राज्य थे—
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सार्डिनिया-पाइडमोंट
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लोम्बार्डी और वेनेटिया (ऑस्ट्रिया के नियंत्रण में)
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टू सिसिलीज़ (दक्षिण इटली)
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पोप का राज्य (रोम)
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पार्मा, मोडेना और टस्कनी
उत्तरी इटली पर विशेष रूप से Austria का प्रभाव था। ऑस्ट्रिया नहीं चाहता था कि इटली एक शक्तिशाली राष्ट्र बने।
हालाँकि इटली के लोग भाषा, संस्कृति और इतिहास के कारण स्वयं को एक ही राष्ट्र का मानते थे। यही भावना धीरे-धीरे राष्ट्रवाद में बदल गई।
🔹 राष्ट्रवाद का उदय और माज़िनी
इटली में राष्ट्रवाद को सबसे पहले मजबूत रूप से आगे बढ़ाया Giuseppe Mazzini ने।
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1831 में उन्होंने Young Italy (Giovine Italia) नामक संगठन की स्थापना की।
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उनका उद्देश्य था – इटली को एक गणराज्य बनाना।
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उन्होंने युवाओं को स्वतंत्रता और एकता के लिए प्रेरित किया।
माज़िनी की कई क्रांतियाँ असफल रहीं, लेकिन उनके विचारों ने पूरे इटली में राष्ट्रीय चेतना जगा दी। वे मानते थे कि जनता के बल पर ही एकता संभव है।
🔹 कावूर की कूटनीति और व्यावहारिक नीति
जहाँ माज़िनी आदर्शवादी थे, वहीं Camillo Benso, Count of Cavour व्यावहारिक राजनीतिज्ञ थे। वे सार्डिनिया-पाइडमोंट के प्रधानमंत्री थे।
कावूर ने समझा कि केवल क्रांति से काम नहीं चलेगा। उन्होंने—
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सेना को मजबूत किया
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उद्योग और व्यापार को बढ़ावा दिया
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यूरोपीय शक्तियों से संबंध सुधारे
उन्होंने फ्रांस के सम्राट Napoleon III से समझौता किया कि यदि ऑस्ट्रिया से युद्ध होगा तो फ्रांस सहायता करेगा।
🔹 1859 का युद्ध – ऑस्ट्रिया की हार
1859 में सार्डिनिया और फ्रांस ने मिलकर ऑस्ट्रिया पर हमला किया। यह युद्ध इटली के लिए निर्णायक साबित हुआ।
परिणाम:
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लोम्बार्डी ऑस्ट्रिया से मुक्त हुआ।
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मध्य इटली के राज्यों ने जनमत संग्रह द्वारा सार्डिनिया में शामिल होना स्वीकार किया।
इस प्रकार इटली का उत्तरी और मध्य भाग एकजुट होने लगा।
🔹 गैरीबाल्डी और दक्षिण इटली की क्रांति
इटली के एकीकरण में सबसे रोमांचक और साहसिक भूमिका निभाई Giuseppe Garibaldi ने।
1860 में उन्होंने लगभग 1000 स्वयंसेवकों (Red Shirts) के साथ सिसिली पर आक्रमण किया।
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उन्होंने सिसिली और नेपल्स पर विजय प्राप्त की।
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दक्षिण इटली के लोगों ने उनका समर्थन किया।
हालाँकि वे गणराज्य चाहते थे, लेकिन राष्ट्रीय एकता के लिए उन्होंने जीते हुए क्षेत्र राजा को सौंप दिए।
🔹 1861 – इटली का राज्य घोषित
1861 में इटली को एकीकृत राज्य घोषित किया गया।
राजा बने – Victor Emmanuel II
हालाँकि अभी वेनेटिया और रोम इटली में शामिल नहीं हुए थे।
🔹 1866 – वेनेटिया का विलय
1866 में ऑस्ट्रिया और Prussia के बीच युद्ध हुआ। इटली ने प्रूसिया का साथ दिया।
परिणाम:
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ऑस्ट्रिया की हार हुई
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वेनेटिया इटली को मिल गया
🔹 1870 – रोम का एकीकरण
1870 में Franco-Prussian War शुरू हुआ। फ्रांस को अपनी सेना रोम से हटानी पड़ी।
इटली ने अवसर का लाभ उठाकर रोम पर कब्जा कर लिया।
1871 में रोम को राजधानी घोषित कर दिया गया।
इस प्रकार इटली का पूर्ण एकीकरण हो गया।
🔥 इटली के एकीकरण के प्रमुख कारण
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राष्ट्रवाद की भावना
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माज़िनी की विचारधारा
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कावूर की कूटनीति
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गैरीबाल्डी की सैन्य वीरता
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ऑस्ट्रिया की कमजोरी
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यूरोप की बदलती राजनीतिक परिस्थितियाँ
🎯 एकीकरण के परिणाम
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इटली एक शक्तिशाली राष्ट्र बना
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जर्मनी के एकीकरण को प्रेरणा मिली
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यूरोप में शक्ति संतुलन बदला
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पोप और सरकार के बीच विवाद उत्पन्न हुआ
📜 निष्कर्ष
इटली का एकीकरण विचार, कूटनीति और युद्ध का अनोखा संगम था।
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Giuseppe Mazzini ने राष्ट्रवाद की भावना जगाई।
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Camillo Benso, Count of Cavour ने राजनीतिक रणनीति अपनाई।
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Giuseppe Garibaldi ने साहस और बलिदान का परिचय दिया।
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Victor Emmanuel II ने नेतृत्व संभाला।
इन सबके प्रयासों से 1871 में इटली एक मजबूत और एकीकृत राष्ट्र बना।