आग का रंग पीला क्यों दिखाई देता है? ( BY - PRAVEEN PRAJAPATI)



आग मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक आग ने मानव सभ्यता के विकास में अहम भूमिका निभाई है। खाना पकाने, प्रकाश प्राप्त करने, ठंड से बचने और औद्योगिक कार्यों में आग का उपयोग होता आया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आग का रंग अक्सर पीला ही क्यों दिखाई देता है? कभी-कभी आग नीली, नारंगी या लाल भी दिखाई देती है, लेकिन सामान्य रूप से हमें मोमबत्ती या लकड़ी की आग पीली ही नजर आती है। इसके पीछे विज्ञान के कई रोचक कारण छिपे हुए हैं।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आग का रंग पीला क्यों होता है, इसके पीछे कौन-कौन से वैज्ञानिक सिद्धांत कार्य करते हैं, और किन परिस्थितियों में आग का रंग बदल जाता है।

1. आग क्या है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आग वास्तव में है क्या। आग एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसे दहन (Combustion) कहा जाता है। जब कोई पदार्थ (जैसे लकड़ी, कागज, गैस या तेल) ऑक्सीजन के साथ प्रतिक्रिया करता है और ऊर्जा उत्पन्न करता है, तो उसे दहन कहते हैं। इस प्रक्रिया में गर्मी और प्रकाश निकलता है, और यही प्रकाश हमें आग के रूप में दिखाई देता है।

दहन के दौरान ईंधन के अणु टूटते हैं और नए यौगिक बनते हैं। इस रासायनिक प्रतिक्रिया से ऊर्जा निकलती है, जो प्रकाश और ऊष्मा के रूप में दिखाई देती है।

2. प्रकाश और रंग का विज्ञान

आग का रंग समझने के लिए हमें प्रकाश और रंग के विज्ञान को समझना होगा। प्रकाश कई रंगों का मिश्रण होता है। जब कोई वस्तु गर्म होती है, तो उसके परमाणु और अणु अधिक गति करने लगते हैं। इस ऊर्जा के कारण वे प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। यह प्रकाश विभिन्न तरंग दैर्ध्य (Wavelength) का होता है, और तरंग दैर्ध्य के आधार पर ही रंग निर्धारित होता है।

कम तापमान पर लाल रंग दिखाई देता है, उससे अधिक तापमान पर नारंगी और पीला, और बहुत अधिक तापमान पर नीला या सफेद रंग दिखाई देता है।

3. आग का पीला रंग – मुख्य कारण

अब मुख्य प्रश्न पर आते हैं—आग पीली क्यों दिखाई देती है?

(क) अधूरा दहन (Incomplete Combustion)

जब ईंधन पूरी तरह से ऑक्सीजन के साथ नहीं जल पाता, तो अधूरा दहन होता है। इस प्रक्रिया में छोटे-छोटे कार्बन के कण (Soot particles) बनते हैं। ये कार्बन कण अत्यधिक गर्म हो जाते हैं और चमकने लगते हैं। जब ये कण गर्म होकर प्रकाश उत्सर्जित करते हैं, तो वे पीला या नारंगी रंग देते हैं।

मोमबत्ती की लौ इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। मोमबत्ती जलने पर उसके अंदर कार्बन के सूक्ष्म कण बनते हैं, जो गर्म होकर पीली रोशनी देते हैं।

(ख) तापमान का प्रभाव

आग का रंग उसके तापमान पर भी निर्भर करता है। सामान्य लकड़ी या मोमबत्ती की आग का तापमान इतना अधिक नहीं होता कि वह नीली दिखाई दे। इसलिए वह पीली या नारंगी दिखाई देती है।

लगभग:

  • 600–800°C पर लाल रंग

  • 1000°C के आसपास पीला रंग

  • 1400°C या अधिक पर नीला रंग

इसलिए सामान्य घरेलू आग का तापमान पीला रंग उत्पन्न करता है।

(ग) सोडियम तत्व की भूमिका

आग के पीले रंग का एक और महत्वपूर्ण कारण सोडियम (Sodium) है। अधिकांश प्राकृतिक पदार्थों में थोड़ी मात्रा में सोडियम पाया जाता है। जब यह जलता है, तो यह विशिष्ट पीला प्रकाश उत्सर्जित करता है। यह पीला रंग इतना तेज होता है कि अन्य रंगों को दबा देता है।

इसी कारण जब हम नमक (जिसमें सोडियम होता है) को आग में डालते हैं, तो लौ और अधिक पीली हो जाती है।

4. आग के विभिन्न रंग और उनके कारण

आग केवल पीली ही नहीं होती। उसका रंग परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।

(1) नीली आग

जब दहन पूरी तरह से होता है और पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध होती है, तो आग नीली दिखाई देती है। गैस चूल्हे की लौ इसका उदाहरण है। इसमें कार्बन कण नहीं बनते, इसलिए पीली रोशनी नहीं निकलती। नीला रंग उच्च तापमान और पूर्ण दहन को दर्शाता है।

(2) लाल और नारंगी आग

कम तापमान पर या धीमी जलन में आग लाल या नारंगी दिखाई देती है। अंगारों में हमें लाल रंग दिखाई देता है।

(3) हरी या बैंगनी आग

कुछ विशेष धातुएं जलने पर अलग-अलग रंग देती हैं:

  • तांबा (Copper) – हरा रंग

  • पोटैशियम – बैंगनी रंग

  • स्ट्रॉन्शियम – लाल रंग

  • बेरियम – हरा रंग

इनका उपयोग आतिशबाजी में किया जाता है।

5. मोमबत्ती की लौ की संरचना

मोमबत्ती की लौ को तीन भागों में बांटा जा सकता है:

  1. अंदरूनी भाग (नीला) – यहां ईंधन वाष्पीकृत हो रहा होता है।

  2. मध्य भाग (पीला) – यहां कार्बन कण चमकते हैं और पीला रंग देते हैं।

  3. बाहरी भाग (नीला) – यहां पूर्ण दहन होता है।

इससे स्पष्ट होता है कि पीला रंग मुख्यतः कार्बन कणों की चमक के कारण होता है।

6. दैनिक जीवन में उदाहरण

  • रसोई गैस: नीली लौ (पूर्ण दहन)

  • लकड़ी का चूल्हा: पीली या नारंगी लौ (अधूरा दहन)

  • मोमबत्ती: पीली लौ (कार्बन कणों के कारण)

7. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से निष्कर्ष

आग का रंग कई कारकों पर निर्भर करता है:

  1. तापमान

  2. ऑक्सीजन की मात्रा

  3. ईंधन का प्रकार

  4. उपस्थित रासायनिक तत्व

आग का पीला रंग मुख्यतः अधूरे दहन से बने कार्बन कणों की चमक और सोडियम तत्व के उत्सर्जन के कारण होता है। जब ये कण अत्यधिक गर्म होते हैं, तो वे पीली रोशनी उत्पन्न करते हैं।

8. क्या आग हमेशा पीली ही होती है?

नहीं। आग का रंग बदल सकता है। यदि आप गैस स्टोव की लौ देखें तो वह नीली होती है, क्योंकि उसमें पूर्ण दहन होता है। यदि लकड़ी जलती है तो वह पीली या नारंगी दिखाई देती है।

इससे यह स्पष्ट है कि आग का रंग उसकी रासायनिक और भौतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

निष्कर्ष

आग का पीला रंग कोई संयोग नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम है। जब ईंधन पूरी तरह से नहीं जलता, तो कार्बन के सूक्ष्म कण बनते हैं जो अत्यधिक गर्म होकर पीली रोशनी उत्पन्न करते हैं। साथ ही, सोडियम जैसे तत्व भी पीले रंग में योगदान देते हैं।

इस प्रकार आग का रंग हमें उसके तापमान और दहन की गुणवत्ता के बारे में जानकारी देता है। विज्ञान के इस छोटे से रहस्य को समझकर हम यह जान सकते हैं कि प्रकृति के हर दृश्य के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण अवश्य होता है। 

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