सूर्य ग्रहण क्या होता है? by priya gupta

 

सूर्य ग्रहण
एक खगोलीय घटना है जो तब होती है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा, सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुँचने से कुछ समय के लिए रोक देता है।

सीधे शब्दों में:

जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश ढक जाता है — उसे सूर्य ग्रहण कहते हैं।

सूर्य ग्रहण कैसे होता है?

सूर्य हमारे सौरमंडल का केंद्र है। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है और चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर घूमता है।

कभी-कभी ऐसा संयोग बनता है कि:

  • सूर्य

  • चंद्रमा

  • पृथ्वी

एक ही सीध में आ जाते हैं।

जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तो उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है — और वहीं से सूर्य ग्रहण दिखाई देता है।

 सूर्य ग्रहण के प्रकार

1️⃣ पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse)

जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेता है, तब पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है।
इस समय दिन में कुछ मिनटों के लिए अंधेरा छा जाता है।

ऐसा दुर्लभ दृश्य कई बार दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में देखा गया है।

2️⃣ आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse)

जब चंद्रमा सूर्य का केवल कुछ हिस्सा ढकता है, तब आंशिक सूर्य ग्रहण होता है।
इसमें सूर्य का कुछ भाग चमकता रहता है।

3️⃣ कंकणाकृति सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse)

जब चंद्रमा सूर्य के बीच में होता है लेकिन पूरी तरह से उसे ढक नहीं पाता, तब सूर्य के चारों ओर अंगूठी जैसा प्रकाश दिखाई देता है।
इसे “Ring of Fire” भी कहा जाता है।

 सूर्य ग्रहण कितनी बार होता है?

हर साल कम से कम 2 और अधिकतम 5 सूर्य ग्रहण हो सकते हैं।
लेकिन हर ग्रहण हर देश में दिखाई नहीं देता।

🧭 सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक कारण

सूर्य ग्रहण एक पूरी तरह वैज्ञानिक घटना है।
इसमें कोई चमत्कार नहीं होता।

  • चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है।

  • जहाँ पूरी छाया (Umbra) पड़ती है, वहाँ पूर्ण ग्रहण।

  • जहाँ आंशिक छाया (Penumbra) पड़ती है, वहाँ आंशिक ग्रहण।

 इतिहास में सूर्य ग्रहण

प्राचीन सभ्यताओं में लोग सूर्य ग्रहण को रहस्यमय मानते थे।

भारत में, ग्रहण का वर्णन Rigveda और अन्य प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।

पौराणिक कथा के अनुसार, राहु-केतु सूर्य को निगल लेते हैं।
लेकिन विज्ञान ने सिद्ध किया कि यह एक खगोलीय प्रक्रिया है।

 वैज्ञानिक महत्व

सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

  • सूर्य की बाहरी परत (Corona) का अध्ययन

  • प्रकाश के झुकाव (Relativity) का परीक्षण

1919 में वैज्ञानिकों ने ग्रहण के दौरान अल्बर्ट आइंस्टीन के सिद्धांत की पुष्टि की थी।

 सूर्य ग्रहण को कैसे देखें?

सावधानी जरूरी है!

सूर्य ग्रहण को नंगी आँखों से सीधे नहीं देखना चाहिए।

सुरक्षित तरीके:

  • सोलर फिल्टर चश्मा

  • वेल्डिंग ग्लास (14 नंबर)

  • पिनहोल प्रोजेक्टर

गलत तरीके:

  • काला चश्मा

  • एक्स-रे फिल्म

  • बिना सुरक्षा के देखना

 सूर्य ग्रहण और धार्मिक मान्यताएँ

भारत में ग्रहण के समय:

  • मंदिर बंद किए जाते हैं

  • लोग स्नान और दान करते हैं

  • गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है

ये मान्यताएँ सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी हैं।

 प्रसिद्ध सूर्य ग्रहण

🌑 2017 का महान सूर्य ग्रहण

21 अगस्त 2017 को अमेरिका में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा गया।

🌑 2020 का सूर्य ग्रहण

21 जून 2020 को भारत में कंकणाकृति ग्रहण देखा गया।

 सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण में अंतर

सूर्य ग्रहणचंद्र ग्रहण
चंद्रमा सूर्य को ढकता हैपृथ्वी चंद्रमा को ढकती है
अमावस्या के दिनपूर्णिमा के दिन
दिन में होता हैरात में होता है

🧠 रोचक तथ्य

  • सूर्य ग्रहण कुछ मिनटों के लिए ही होता है।

  • पूर्ण ग्रहण अधिकतम लगभग 7 मिनट तक रह सकता है।

  • हर 18 साल 11 दिन में “सारोस चक्र” दोहराता है।

 आधुनिक विज्ञान और अंतरिक्ष एजेंसियाँ

सूर्य ग्रहण का अध्ययन कई अंतरिक्ष संस्थाएँ करती हैं, जैसे:

  • NASA

  • ISRO

ये संस्थाएँ ग्रहण के दौरान सूर्य के तापमान, किरणों और कोरोना का अध्ययन करती हैं।

 निष्कर्ष

सूर्य ग्रहण एक अद्भुत और सुंदर खगोलीय घटना है।
यह हमें ब्रह्मांड की सटीकता और प्रकृति के नियमों की याद दिलाता है।

जहाँ पहले इसे डर और अंधविश्वास से जोड़ा जाता था, वहीं आज विज्ञान ने इसे पूरी तरह समझ लिया है।

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