🌿 आयुर्वेद की उत्पत्ति और पतन – विस्तृत इतिहास ( By :- Raj gupta )

 


प्रस्तावना

आयुर्वेद भारत की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है, जो केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण जीवन को संतुलित, स्वस्थ और दीर्घायु बनाने की समग्र प्रणाली है। “आयुर्वेद” शब्द दो संस्कृत शब्दों – आयु (जीवन) और वेद (ज्ञान) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है जीवन का विज्ञान

आज जब पूरी दुनिया प्राकृतिक चिकित्सा और समग्र स्वास्थ्य (Holistic Health) की ओर बढ़ रही है, तब आयुर्वेद फिर से वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इस विस्तृत लेख में हम आयुर्वेद की उत्पत्ति, विकास, स्वर्णकाल, पतन, पुनर्जागरण और आधुनिक स्थिति का गहन अध्ययन करेंगे।

भाग 1: आयुर्वेद की उत्पत्ति

1. वेदों में आयुर्वेद का उल्लेख

आयुर्वेद का आधार प्राचीन वैदिक साहित्य में मिलता है। विशेष रूप से:

  • ऋग्वेद

  • अथर्ववेद

इन ग्रंथों में औषधियों, जड़ी-बूटियों, रोगों और उपचार के मंत्रों का वर्णन मिलता है। अथर्ववेद में तो कई स्थानों पर वनस्पतियों को “औषधि माता” कहा गया है।

2. पौराणिक उत्पत्ति कथा

भारतीय परंपरा के अनुसार आयुर्वेद का ज्ञान दिव्य स्रोत से प्राप्त हुआ:

ब्रह्मा → प्रजापति → अश्विनी कुमार → इंद्र → धन्वंतरि → ऋषि

  • धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है।

  • समुद्र मंथन के समय धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए।

यह कथा इस बात का प्रतीक है कि आयुर्वेद को अमृत तुल्य माना गया।

भाग 2: आयुर्वेद का शास्त्रीय विकास

1. आचार्य चरक और कायचिकित्सा

  • चरक

  • ग्रंथ: चरक संहिता

चरक संहिता में:

  • त्रिदोष सिद्धांत (वात, पित्त, कफ)

  • रोगों के कारण और निदान

  • 2000+ औषधियों का उल्लेख

  • आहार-विहार का महत्व

चरक ने चिकित्सा को वैज्ञानिक आधार दिया।

2. आचार्य सुश्रुत और शल्य चिकित्सा

  • सुश्रुत

  • ग्रंथ: सुश्रुत संहिता

विशेष योगदान:

  • 300 शल्य क्रियाएँ

  • 120 शल्य उपकरण

  • प्लास्टिक सर्जरी का प्रारंभिक वर्णन

  • हड्डी जोड़ने की तकनीक

सुश्रुत को विश्व का प्रथम सर्जन कहा जाता है।

3. आचार्य वाग्भट्ट

  • वाग्भट्ट

  • ग्रंथ: अष्टांग हृदयम्

इनके ग्रंथ में आयुर्वेद के आठ अंगों का उल्लेख है।

भाग 3: आयुर्वेद का स्वर्णकाल

1. शिक्षा केंद्र

  • तक्षशिला

  • नालंदा

यहाँ आयुर्वेद की उच्च शिक्षा दी जाती थी।

2. अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

  • चीन

  • तिब्बत

  • श्रीलंका

  • अरब देश

अरब विद्वानों ने भारतीय चिकित्सा ग्रंथों का अनुवाद किया।

भाग 4: आयुर्वेद का पतन

1. विदेशी आक्रमण

  • नालंदा का विनाश

  • हजारों पांडुलिपियों का नष्ट होना

2. मुगल काल

यूनानी चिकित्सा को संरक्षण मिला, आयुर्वेद को कम समर्थन मिला।

3. ब्रिटिश शासन

  • एलोपैथी को बढ़ावा

  • आयुर्वेद को “अवैज्ञानिक” बताया गया

  • शिक्षा प्रणाली से बाहर किया गया

भाग 5: स्वतंत्रता के बाद पुनर्जागरण

  • Ministry of AYUSH की स्थापना

  • आयुर्वेदिक विश्वविद्यालयों की स्थापना

  • वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता

भाग 6: आयुर्वेद का वैज्ञानिक आधार

त्रिदोष सिद्धांत

  1. वात

  2. पित्त

  3. कफ

पंचमहाभूत

  • पृथ्वी

  • जल

  • अग्नि

  • वायु

  • आकाश

जीवनशैली

  • दिनचर्या

  • ऋतुचर्या

  • योग और ध्यान

  • पंचकर्म

भाग 7: आधुनिक विश्व में आयुर्वेद

आज:

  • अमेरिका

  • यूरोप

  • ऑस्ट्रेलिया

में आयुर्वेदिक क्लिनिक चल रहे हैं।

WHO भी पारंपरिक चिकित्सा को महत्व दे रहा है।

भाग 8: चुनौतियाँ

  • वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी

  • मानकीकरण की समस्या

  • नकली औषधियाँ

निष्कर्ष

आयुर्वेद भारत की प्राचीन धरोहर है।
इसका जन्म वेदों में हुआ, चरक और सुश्रुत ने इसे शिखर तक पहुँचाया, विदेशी आक्रमण और औपनिवेशिक नीतियों से इसका पतन हुआ, पर आज यह पुनः विश्व में अपनी पहचान बना रहा है।

🌿 आयुर्वेद केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन का मार्ग है।

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