DNA की रासायनिक संरचना – James Watson और Francis Crick की खोज by priya gupta

 

प्रस्तावना

मानव शरीर, पेड़-पौधे, जानवर, सूक्ष्म जीव—सभी जीवित प्राणियों के अंदर एक ऐसी अदृश्य लेकिन अत्यंत शक्तिशाली संरचना मौजूद है, जो उनके जीवन का आधार है। यही संरचना है DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड)। DNA वह अणु है जिसमें जीवन का “ब्लूप्रिंट” या आनुवंशिक जानकारी (Genetic Information) संग्रहित रहती है।

20वीं सदी के मध्य में DNA की संरचना की खोज ने जीवविज्ञान, रसायन विज्ञान और चिकित्सा विज्ञान में क्रांति ला दी। 1953 में दो वैज्ञानिकों—James Watson और Francis Crick—ने DNA की डबल हेलिक्स संरचना का मॉडल प्रस्तुत किया, जिसने यह स्पष्ट किया कि आनुवंशिक जानकारी कैसे संग्रहित और स्थानांतरित होती है।

इस लेख में हम DNA की रासायनिक संरचना, उसकी खोज का इतिहास, वैज्ञानिक सिद्धांत, तथा उसके महत्व को विस्तार से समझेंगे।

DNA क्या है?

DNA (Deoxyribonucleic Acid) एक जटिल जैव-अणु (Biomolecule) है जो कोशिकाओं के नाभिक (Nucleus) में पाया जाता है। यह जीवों की शारीरिक बनावट, व्यवहार, वृद्धि और वंशानुगत गुणों को नियंत्रित करता है।

DNA को “जीवन की पुस्तक” कहा जाता है क्योंकि इसमें वह सभी निर्देश होते हैं जो किसी जीव को विकसित होने और कार्य करने के लिए आवश्यक होते हैं।

DNA की खोज का इतिहास

DNA की संरचना को समझने से पहले वैज्ञानिकों ने कई चरणों में शोध किया।

1. DNA की प्रारंभिक खोज

1869 में स्विस वैज्ञानिक Friedrich Miescher ने कोशिकाओं के नाभिक से एक पदार्थ अलग किया, जिसे उन्होंने “न्यूक्लिन” नाम दिया। बाद में इसे DNA कहा गया।

2. आनुवंशिक पदार्थ की पहचान

1944 में Oswald Avery और उनके साथियों ने साबित किया कि DNA ही आनुवंशिक सूचना का वाहक है।

3. एक्स-रे विवर्तन अध्ययन

DNA की संरचना समझने में Rosalind Franklin का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था। उन्होंने X-ray diffraction तकनीक से DNA की तस्वीर (Photo 51) प्राप्त की, जिससे उसकी हेलिक्स संरचना का संकेत मिला।

4. 1953 की ऐतिहासिक खोज

1953 में James Watson और Francis Crick ने DNA का डबल हेलिक्स मॉडल प्रस्तुत किया। यह आधुनिक जैवविज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक थी।

DNA की रासायनिक संरचना

DNA एक पॉलिमर (Polymer) है, जो छोटे-छोटे इकाइयों (Monomers) से मिलकर बना होता है। इन इकाइयों को न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide) कहा जाता है।

1. न्यूक्लियोटाइड की संरचना

हर न्यूक्लियोटाइड तीन भागों से मिलकर बना होता है:

  1. फॉस्फेट समूह (Phosphate Group)

  2. डीऑक्सीराइबोज शर्करा (Deoxyribose Sugar)

  3. नाइट्रोजनयुक्त क्षार (Nitrogenous Base)

2. नाइट्रोजनयुक्त क्षार के प्रकार

DNA में चार प्रकार के बेस होते हैं:

  • एडेनिन (Adenine – A)

  • थाइमिन (Thymine – T)

  • ग्वानिन (Guanine – G)

  • साइटोसिन (Cytosine – C)

इनमें से:

  • A हमेशा T के साथ जुड़ता है

  • G हमेशा C के साथ जुड़ता है

इसे Complementary Base Pairing कहते हैं।

3. डबल हेलिक्स संरचना

Watson और Crick ने बताया कि DNA दो लंबी श्रृंखलाओं से बना होता है जो एक-दूसरे के चारों ओर सर्पिल (Helix) रूप में लिपटी होती हैं।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • DNA दो स्ट्रैंड से बना है

  • दोनों स्ट्रैंड विपरीत दिशा (Antiparallel) में होते हैं

  • शर्करा और फॉस्फेट बाहरी ढांचा बनाते हैं

  • बेस अंदर की ओर होते हैं

  • हाइड्रोजन बंध बेस को जोड़ते हैं

इस संरचना को Double Helix Model कहा जाता है।

रासायनिक बंध (Chemical Bonds)

DNA की संरचना में दो प्रमुख बंध होते हैं:

1. फॉस्फोडाइएस्टर बंध (Phosphodiester Bond)

यह बंध न्यूक्लियोटाइड्स को जोड़ता है और DNA की मुख्य रीढ़ (Backbone) बनाता है।

2. हाइड्रोजन बंध (Hydrogen Bond)

  • A–T के बीच 2 हाइड्रोजन बंध

  • G–C के बीच 3 हाइड्रोजन बंध

इसी कारण G–C बंध अधिक मजबूत होता है।

DNA कैसे काम करता है?

DNA की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह स्वयं की प्रतिलिपि (Replication) बना सकता है।

जब कोशिका विभाजन होता है, तो DNA की दोनों स्ट्रैंड अलग हो जाती हैं और प्रत्येक स्ट्रैंड नई पूरक स्ट्रैंड बनाती है।

इस प्रक्रिया को DNA Replication कहते हैं।

केंद्रीय सिद्धांत (Central Dogma)

Molecular Biology का केंद्रीय सिद्धांत कहता है:

DNA → RNA → Protein

अर्थात:

  • DNA से RNA बनता है (Transcription)

  • RNA से प्रोटीन बनता है (Translation)

यही प्रक्रिया जीवों के गुणों को निर्धारित करती है।

खोज का प्रभाव

Watson और Crick की खोज के बाद:

  • आनुवंशिकी विज्ञान में क्रांति आई

  • जेनेटिक इंजीनियरिंग संभव हुई

  • DNA फिंगरप्रिंटिंग शुरू हुई

  • आधुनिक चिकित्सा विकसित हुई

  • जीन थेरेपी की शुरुआत हुई

1962 में Watson, Crick और Maurice Wilkins को नोबेल पुरस्कार मिला।

DNA का आधुनिक उपयोग

आज DNA का उपयोग कई क्षेत्रों में हो रहा है:

  1. अपराध जांच (DNA Fingerprinting)

  2. पितृत्व परीक्षण

  3. आनुवंशिक रोगों की पहचान

  4. वैक्सीन विकास

  5. जैव प्रौद्योगिकी

DNA की संरचना की विशेषताएँ (सारांश)

  • डबल हेलिक्स संरचना

  • चार प्रकार के बेस

  • पूरक युग्मन

  • एंटीपैरलल स्ट्रैंड

  • स्व-प्रतिलिपि क्षमता

निष्कर्ष

DNA की रासायनिक संरचना की खोज 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है। James Watson और Francis Crick ने जिस डबल हेलिक्स मॉडल को प्रस्तुत किया, उसने जीवन के रहस्यों को समझने का मार्ग खोल दिया।

DNA केवल एक अणु नहीं है—यह जीवन की भाषा है। इसके माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी गुणों का स्थानांतरण होता है। आधुनिक विज्ञान, चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी की नींव इसी खोज पर आधारित है।

DNA की संरचना को समझना हमें यह सिखाता है कि जीवन कितना व्यवस्थित, वैज्ञानिक और अद्भुत है।

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