भारतीय नौसेना (Indian Navy) – समुद्र की अजेय शक्ति by priya gupta

 


प्रस्तावना

भारत एक विशाल समुद्री तट वाला देश है। लगभग 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और हिंद महासागर में रणनीतिक स्थिति भारत को समुद्री दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा का दायित्व जिस संस्था पर है, वह है भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना न केवल समुद्र में दुश्मनों से रक्षा करती है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य, अंतरराष्ट्रीय शांति मिशन और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह लेख भारतीय नौसेना के इतिहास, संगठन, युद्ध क्षमता, आधुनिक तकनीक, प्रमुख अभियानों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करता है।

1. भारतीय नौसेना का इतिहास

भारतीय नौसेना का इतिहास बहुत प्राचीन है। प्राचीन भारत में भी समुद्री शक्ति का महत्व समझा जाता था।

 प्राचीन काल

  • सिंधु घाटी सभ्यता में समुद्री व्यापार के प्रमाण मिलते हैं।

  • चोल साम्राज्य ने दक्षिण-पूर्व एशिया तक समुद्री अभियान चलाए।

 ब्रिटिश काल

आधुनिक नौसेना की शुरुआत 1612 में हुई, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने “ईस्ट इंडिया कंपनी मरीन” की स्थापना की।

बाद में इसका नाम बदलकर “रॉयल इंडियन नेवी” कर दिया गया।

 स्वतंत्रता के बाद

15 अगस्त 1947 को भारत की आज़ादी के बाद नौसेना का नाम “इंडियन नेवी” रखा गया।
1950 में भारत गणराज्य बनने के बाद इसे आधिकारिक रूप से भारतीय नौसेना कहा जाने लगा।

2. भारतीय नौसेना का उद्देश्य

भारतीय नौसेना का मुख्य उद्देश्य है:

  1. समुद्री सीमाओं की रक्षा

  2. समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा

  3. युद्ध की स्थिति में शत्रु पर आक्रमण

  4. आपदा राहत और मानवीय सहायता

भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य है:
“शं नो वरुणः” – जिसका अर्थ है “जल के देवता वरुण हमारे लिए शुभ हों।”

3. संगठनात्मक संरचना

भारतीय नौसेना तीन प्रमुख कमांड में विभाजित है:

1️⃣ पश्चिमी नौसेना कमांड – मुंबई

2️⃣ पूर्वी नौसेना कमांड – विशाखापत्तनम

3️⃣ दक्षिणी नौसेना कमांड – कोच्चि

इसके अतिरिक्त अंडमान और निकोबार कमांड एक संयुक्त कमान है।

नौसेना प्रमुख को चीफ ऑफ नेवल स्टाफ कहा जाता है। वर्तमान में यह पद एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी के पास है। (नोट: पद समय के अनुसार बदल सकता है)

4. भारतीय नौसेना के प्रमुख युद्ध

 1965 का भारत-पाक युद्ध

इस युद्ध में नौसेना की भूमिका सीमित रही, लेकिन रणनीतिक तैयारी मजबूत हुई।

 1971 का भारत-पाक युद्ध

यह भारतीय नौसेना का स्वर्णिम अध्याय है।

  • ऑपरेशन ट्राइडेंट

  • ऑपरेशन पाइथन

इन अभियानों में कराची बंदरगाह पर हमला किया गया और पाकिस्तान की नौसैनिक शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

इस युद्ध के बाद भारत की समुद्री शक्ति का लोहा पूरी दुनिया ने माना।

5. आधुनिक युद्धपोत और तकनीक

भारतीय नौसेना आधुनिक तकनीक से लैस है।

 विमानवाहक पोत

  1. INS विक्रमादित्य

  2. INS विक्रांत – भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत

पनडुब्बियाँ

  • परमाणु पनडुब्बी: INS अरिहंत

  • स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियाँ

 विध्वंसक और फ्रिगेट

  • कोलकाता क्लास

  • शिवालिक क्लास

6. मिसाइल और हथियार प्रणाली

भारतीय नौसेना के पास अत्याधुनिक मिसाइलें हैं:

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल

  • बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम

  • टॉरपीडो सिस्टम

ये हथियार समुद्र, हवा और जमीन पर दुश्मन को निशाना बना सकते हैं।

7. मानवीय सहायता और राहत कार्य

भारतीय नौसेना ने कई बार प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य किए हैं:

  • 2004 सुनामी

  • चक्रवात राहत अभियान

  • विदेशों में फंसे भारतीयों की वापसी

कोविड-19 के दौरान भी नौसेना ने “समुद्र सेतु अभियान” चलाकर नागरिकों को वापस लाया।

8. अंतरराष्ट्रीय भूमिका

भारतीय नौसेना संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लेती है।

प्रमुख अभ्यास:

  • मालाबार अभ्यास (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ)

  • वरुण अभ्यास (फ्रांस के साथ)

इन अभ्यासों से भारत की वैश्विक छवि मजबूत होती है।

9. महिला शक्ति और नौसेना

आज भारतीय नौसेना में महिलाएँ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

  • युद्धपोतों पर तैनाती

  • हेलीकॉप्टर पायलट

  • तकनीकी अधिकारी

यह भारतीय सेना में लैंगिक समानता का प्रतीक है।

10. भविष्य की योजनाएँ

भारतीय नौसेना “आत्मनिर्भर भारत” के तहत स्वदेशी निर्माण पर जोर दे रही है।

भविष्य की योजनाएँ:

  • तीसरा विमानवाहक पोत

  • अधिक परमाणु पनडुब्बियाँ

  • ड्रोन और AI आधारित तकनीक

भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक वह हिंद महासागर क्षेत्र की प्रमुख समुद्री शक्ति बने।

11. भारतीय नौसेना का महत्व

भारत की 90% से अधिक विदेशी व्यापार समुद्र के माध्यम से होता है।
यदि समुद्री मार्ग सुरक्षित नहीं होंगे, तो अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

इसलिए भारतीय नौसेना केवल युद्ध की शक्ति नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा की भी गारंटी है।

निष्कर्ष

भारतीय नौसेना भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने वाली एक शक्तिशाली और आधुनिक सेना है।

प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक भारत ने समुद्र में अपनी ताकत साबित की है।
आज भारतीय नौसेना अत्याधुनिक तकनीक, मजबूत रणनीति और समर्पित सैनिकों के बल पर विश्व की प्रमुख नौसेनाओं में शामिल है।

यह केवल एक सैन्य संगठन नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और गौरव का प्रतीक है।

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