Indira Gandhi द्वारा 1975 का आपातकाल: क्यों, कैसे और किसके लिए?
1. प्रस्तावना
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का समय “आपातकाल” (Emergency) के नाम से जाना जाता है। यह वह दौर था जब देश में नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई, और हजारों विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया। यह घटना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी परीक्षा थी।
आपका प्रश्न है—आपातकाल क्यों लगाया गया? कैसे लगाया गया? और किसके लिए लगाया गया? इन तीनों पहलुओं को समझने के लिए हमें उस समय की राजनीतिक, आर्थिक, न्यायिक और सामाजिक परिस्थितियों को विस्तार से देखना होगा।
2. 1970 के दशक की पृष्ठभूमि
(क) राजनीतिक स्थिति
1971 में इंदिरा गांधी ने “गरीबी हटाओ” के नारे के साथ चुनाव जीता। उसी वर्ष भारत-पाक युद्ध हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश बना। इस जीत ने इंदिरा गांधी की लोकप्रियता को चरम पर पहुँचा दिया।
लेकिन 1973-74 के बाद परिस्थितियाँ बदलने लगीं। विपक्षी दल मजबूत होने लगे और सरकार पर भ्रष्टाचार तथा तानाशाही के आरोप लगने लगे।
(ख) आर्थिक संकट
1973 के वैश्विक तेल संकट के कारण भारत में:
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महँगाई तेजी से बढ़ी
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बेरोजगारी बढ़ी
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खाद्यान्न की कमी हुई
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औद्योगिक उत्पादन प्रभावित हुआ
रेलवे कर्मचारियों की 1974 की हड़ताल (जिसका नेतृत्व जॉर्ज फर्नांडिस ने किया) ने सरकार को हिला दिया।
जनता में असंतोष बढ़ने लगा।
3. छात्र आंदोलन और “संपूर्ण क्रांति”
गुजरात का नव निर्माण आंदोलन
1974 में गुजरात में छात्रों ने भ्रष्टाचार और महँगाई के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। यह इतना व्यापक हो गया कि राज्य सरकार को भंग करना पड़ा।
बिहार आंदोलन
बिहार में भी छात्रों ने आंदोलन शुरू किया। इसका नेतृत्व किया:
Jayaprakash Narayan
जेपी ने “संपूर्ण क्रांति” का नारा दिया। उन्होंने पुलिस और सेना से भी कहा कि वे “अन्यायपूर्ण आदेशों का पालन न करें।”
सरकार को लगा कि यह विद्रोह की स्थिति है और सत्ता को सीधी चुनौती दी जा रही है।
4. इलाहाबाद हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
Allahabad High Court ने 12 जून 1975 को ऐतिहासिक निर्णय दिया।
इस निर्णय में:
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इंदिरा गांधी का 1971 का चुनाव अवैध घोषित किया गया
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उन पर चुनावी भ्रष्टाचार का आरोप सिद्ध हुआ
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6 वर्ष तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया
यह फैसला प्रधानमंत्री पद के लिए सीधा खतरा था।
हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक राहत दी, लेकिन स्थिति अस्थिर बनी रही। विपक्ष ने उनके इस्तीफे की माँग तेज कर दी।
5. आपातकाल कैसे घोषित किया गया?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 352 राष्ट्रपति को “आंतरिक अशांति” (Internal Disturbance) के आधार पर आपातकाल घोषित करने की शक्ति देता है।
25 जून 1975 की रात:
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इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति से आपातकाल की सिफारिश की
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तत्कालीन राष्ट्रपति Fakhruddin Ali Ahmed ने हस्ताक्षर किए
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आधी रात को ऑल इंडिया रेडियो पर घोषणा की गई
घोषणा के साथ ही देश में आपातकाल लागू हो गया।
6. आपातकाल के दौरान क्या-क्या हुआ?
(1) विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी
MISA (Maintenance of Internal Security Act) के तहत हजारों नेताओं को गिरफ्तार किया गया, जिनमें शामिल थे:
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Jayaprakash Narayan
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Morarji Desai
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Atal Bihari Vajpayee
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Lal Krishna Advani
(2) प्रेस पर सेंसरशिप
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अखबारों को सरकारी अनुमति के बिना कुछ छापने की अनुमति नहीं थी
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आलोचनात्मक लेखों पर प्रतिबंध
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कई पत्रकार गिरफ्तार
यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा आघात था।
(3) मौलिक अधिकारों का निलंबन
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नागरिकों के मौलिक अधिकार स्थगित
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बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) भी अस्वीकार
ADM जबलपुर केस में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया, जिससे नागरिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
(4) 20 सूत्रीय कार्यक्रम
इंदिरा गांधी ने 20-सूत्रीय कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें शामिल थे:
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गरीबी हटाओ
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भूमि सुधार
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मूल्य नियंत्रण
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भ्रष्टाचार विरोध
सरकार का दावा था कि आपातकाल अनुशासन और विकास के लिए आवश्यक था।
(5) संजय गांधी की भूमिका
Sanjay Gandhi का प्रभाव इस दौरान काफी बढ़ गया।
उन्होंने पाँच सूत्रीय कार्यक्रम चलाया, जिसमें:
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परिवार नियोजन
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वृक्षारोपण
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दहेज विरोध
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साक्षरता
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झुग्गी हटाओ
विशेष रूप से नसबंदी अभियान विवादित रहा। कई जगहों पर जबरन नसबंदी कराई गई, जिससे जनता में भारी रोष फैला।
7. 42वाँ संविधान संशोधन
1976 में 42वाँ संशोधन लाया गया:
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संसद की शक्तियाँ बढ़ीं
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न्यायपालिका की शक्ति सीमित हुई
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“समाजवादी” और “धर्मनिरपेक्ष” शब्द संविधान की प्रस्तावना में जोड़े गए
आलोचकों ने इसे “मिनी संविधान” कहा।
8. क्या आपातकाल देशहित में था?
सरकार का पक्ष
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देश में अराजकता थी
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अनुशासन की आवश्यकता थी
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विकास कार्य तेज हुए
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अपराध दर कम हुई
आलोचकों का पक्ष
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लोकतंत्र का दमन
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सत्ता बचाने की कोशिश
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व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला
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विपक्ष को खत्म करने की रणनीति
सच्चाई शायद इन दोनों के बीच कहीं है, लेकिन व्यापक मत यह है कि लोकतंत्र को नुकसान पहुँचा।
9. आपातकाल का अंत
जनवरी 1977 में इंदिरा गांधी ने अचानक चुनाव की घोषणा की।
मार्च 1977 में चुनाव हुए।
परिणाम:
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कांग्रेस की हार
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जनता पार्टी की जीत
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Morarji Desai प्रधानमंत्री बने
यह भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत थी।
10. 44वाँ संविधान संशोधन
1978 में जनता सरकार ने 44वाँ संशोधन किया:
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“आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह” शब्द जोड़ा गया
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मौलिक अधिकारों की सुरक्षा मजबूत हुई
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आपातकाल लागू करना कठिन बना
11. दीर्घकालिक प्रभाव
(1) लोकतांत्रिक चेतना
जनता अधिक जागरूक हुई।
(2) राजनीतिक बदलाव
कई क्षेत्रीय दल मजबूत हुए।
(3) न्यायपालिका की भूमिका
बाद के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक अधिकारों की रक्षा पर अधिक जोर दिया।
12. निष्कर्ष
1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे विवादास्पद अध्याय है।
यह राजनीतिक संकट, न्यायिक चुनौती और सामाजिक अस्थिरता की पृष्ठभूमि में लगाया गया था। लेकिन इसके परिणामस्वरूप लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमजोर हुईं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर अंकुश लगा।
1977 के चुनाव ने साबित कर दिया कि भारत में अंतिम शक्ति जनता के पास है।
आपातकाल आज भी एक चेतावनी के रूप में याद किया जाता है—कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सतर्कता आवश्यक है।
