Jawaharlal Nehru : जीवन, विचारधारा और आधुनिक भारत के निर्माता(Shivam Gupta)

 


भारत के स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्र भारत के निर्माण में यदि किसी नेता की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही, तो वह पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे और लगभग 17 वर्षों तक इस पद पर रहे। उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पकार भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने देश को लोकतंत्र, वैज्ञानिक सोच और औद्योगिक विकास की दिशा दी।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ। उनके पिता मोतीलाल नेहरू एक प्रसिद्ध वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनकी माता का नाम स्वरूप रानी नेहरू था। नेहरू एक समृद्ध परिवार से थे, इसलिए उनकी शिक्षा बहुत अच्छे वातावरण में हुई।

उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही प्राप्त की। बाद में वे इंग्लैंड के हैरो स्कूल और फिर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ने गए। उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी कर बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त की। विदेश में रहते हुए वे लोकतंत्र, स्वतंत्रता और समाजवाद के विचारों से प्रभावित हुए।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

भारत लौटने के बाद नेहरू ने वकालत शुरू की, लेकिन जल्द ही वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए। वे महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलनों से अत्यधिक प्रभावित हुए।

उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। इस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। कुल मिलाकर उन्होंने लगभग 9 वर्ष जेल में बिताए।

1929 में लाहौर अधिवेशन में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। इसी अधिवेशन में “पूर्ण स्वराज” का प्रस्ताव पारित किया गया और 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री

15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, तब जवाहरलाल नेहरू देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने। उन्होंने “ट्रिस्ट विद डेस्टिनी” नामक ऐतिहासिक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने कहा –
“At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India will awake to life and freedom.”

प्रधानमंत्री के रूप में उनका मुख्य लक्ष्य था – भारत को एक मजबूत, आधुनिक और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाना।

आधुनिक भारत के निर्माण में भूमिका

नेहरू ने देश में लोकतंत्र की मजबूत नींव रखी। उन्होंने संविधान के आदर्शों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया और बड़े-बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग स्थापित किए। भाखड़ा नांगल बांध, हिराकुंड बांध और कई बड़े कारखाने उनके कार्यकाल में बने।

उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) और वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा दिया। उनका मानना था कि विज्ञान और तकनीक के बिना देश का विकास संभव नहीं है।

उन्होंने योजना आयोग की स्थापना की और पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक विकास की रूपरेखा तैयार की।

विदेश नीति और गुटनिरपेक्ष आंदोलन

नेहरू की विदेश नीति का आधार शांति और सहयोग था। वे गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) के प्रमुख नेताओं में से एक थे।

उन्होंने शीत युद्ध के समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच किसी भी गुट में शामिल होने से इनकार किया। उनका उद्देश्य था कि भारत स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनाए।

उन्होंने “पंचशील सिद्धांत” का समर्थन किया, जो आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व पर आधारित था।

चीन और पाकिस्तान के साथ संबंध

नेहरू के कार्यकाल में भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 1947-48 में कश्मीर को लेकर पाकिस्तान से युद्ध हुआ।

1962 में चीन के साथ युद्ध ने भारत को बड़ा झटका दिया। इस युद्ध में भारत को हार का सामना करना पड़ा, जिससे नेहरू की छवि को भी नुकसान पहुँचा।

बच्चों के प्रिय “चाचा नेहरू”

जवाहरलाल नेहरू बच्चों से बहुत प्रेम करते थे। बच्चे उन्हें “चाचा नेहरू” कहते थे। उनके जन्मदिन 14 नवंबर को भारत में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

वे मानते थे कि देश का भविष्य बच्चों के हाथ में है, इसलिए उन्हें अच्छी शिक्षा और संस्कार मिलना चाहिए।

साहित्यिक योगदान

नेहरू एक अच्छे लेखक भी थे। उन्होंने जेल में रहते हुए कई पुस्तकें लिखीं, जिनमें प्रमुख हैं –

  • “Discovery of India”

  • “Glimpses of World History”

  • “Letters from a Father to His Daughter”

इन पुस्तकों में उन्होंने इतिहास, संस्कृति और राजनीति पर अपने विचार व्यक्त किए।

विचारधारा

नेहरू लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और समाजवाद के समर्थक थे। वे चाहते थे कि भारत एक ऐसा देश बने जहाँ सभी धर्मों और समुदायों को समान अधिकार मिले।

उनका मानना था कि आधुनिकता और परंपरा का संतुलन बनाकर ही भारत आगे बढ़ सकता है।

मृत्यु और विरासत

27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू का निधन हो गया। उनकी मृत्यु से पूरा देश शोक में डूब गया।

उनकी विरासत आज भी भारत की राजनीति, शिक्षा और विदेश नीति में दिखाई देती है। उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है।

निष्कर्ष

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जीवन संघर्ष, नेतृत्व और दूरदर्शिता का प्रतीक था। उन्होंने भारत को लोकतंत्र, औद्योगिक विकास और वैज्ञानिक सोच की दिशा दी।

हालाँकि उनके कार्यकाल में कुछ आलोचनाएँ भी हुईं, लेकिन यह सत्य है कि उन्होंने स्वतंत्र भारत की नींव को मजबूत बनाया।

आज भी जब भारत विज्ञान, तकनीक और लोकतंत्र के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, तो उसमें नेहरू के सपनों की झलक दिखाई देती है।

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