Overthinking कैसे बंद करें(by Nitya Maddheshiya )

 

Overthinking कैसे बंद करें? – पूरी गाइड (विस्तृत लेख)

आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति ओवरथिंकिंग (Overthinking) की समस्या से जूझ रहा है। छोटी-छोटी बातों को बार-बार सोचते रहना, भविष्य की चिंता करना, पुराने घटनाओं को याद कर पछताना—ये सब ओवरथिंकिंग के लक्षण हैं।

अगर आप भी हर बात को ज़रूरत से ज़्यादा सोचते हैं और दिमाग शांत नहीं रहता, तो यह लेख आपके लिए है। यहाँ हम जानेंगे:

  • Overthinking क्या है?

  • यह क्यों होती है?

  • इसके नुकसान क्या हैं?

  • और सबसे महत्वपूर्ण — इसे कैसे बंद करें?



1. Overthinking क्या है?

ओवरथिंकिंग का मतलब है किसी बात को जरूरत से ज्यादा सोचना।

उदाहरण:

  • “मैंने जो बात कही, वो सही थी या गलत?”

  • “अगर मैं फेल हो गया तो क्या होगा?”

  • “लोग मेरे बारे में क्या सोचते होंगे?”

जब दिमाग एक ही विचार को बार-बार दोहराता है और आप उसे रोक नहीं पाते, तो यह Overthinking है।

2. Overthinking के प्रकार

(1) Past Overthinking

पुरानी गलतियों को याद करना, “काश मैंने ऐसा किया होता…”

(2) Future Overthinking

भविष्य की चिंता – “अगर ऐसा हो गया तो?”

(3) Social Overthinking

लोग क्या सोचेंगे? उन्होंने ऐसा क्यों कहा?

3. Overthinking क्यों होती है?

1. डर और असुरक्षा

जब हमें अपने फैसलों पर भरोसा नहीं होता।

2. आत्मविश्वास की कमी

खुद पर विश्वास न होना।

3. ज्यादा खाली समय

खाली दिमाग ज्यादा सोचता है।

4. परफेक्शन की आदत

हर काम में परफेक्ट बनना चाहना।

5. तुलना करना

खुद को दूसरों से तुलना करना।

4. Overthinking के नुकसान

  • मानसिक तनाव

  • नींद की समस्या

  • आत्मविश्वास की कमी

  • गलत फैसले

  • काम में ध्यान न लगना

अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो यह चिंता (Anxiety) और डिप्रेशन तक ले जा सकती है।

अब सबसे जरूरी हिस्सा 👇

Overthinking कैसे बंद करें?

1. 5-5-5 नियम अपनाएं

खुद से पूछें:

  • क्या यह बात 5 दिन बाद मायने रखेगी?

  • 5 महीने बाद?

  • 5 साल बाद?

अगर जवाब “नहीं” है, तो छोड़ दीजिए।

2. खुद को व्यस्त रखें

खाली समय Overthinking बढ़ाता है।

  • नई स्किल सीखें

  • किताब पढ़ें

  • एक्सरसाइज करें

  • परिवार से बात करें

3. वर्तमान में जीना सीखें

अक्सर हम या तो अतीत में रहते हैं या भविष्य में।
ध्यान (Meditation) करें।
गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस करें।

Exercise:
4 सेकंड सांस लें → 4 सेकंड रोकें → 4 सेकंड छोड़ें।

4. लिखना शुरू करें (Journaling)

जो भी मन में चल रहा है, उसे लिख दें।
जब विचार कागज पर आ जाते हैं, तो दिमाग हल्का हो जाता है।

5. खुद से सकारात्मक बातें करें

गलत सोच: “मैं हमेशा गलत करता हूँ।”
सही सोच: “मैं सीख रहा हूँ और बेहतर बन रहा हूँ।”

6. निर्णय लेने की आदत डालें

हर छोटी बात पर सोचते न रहें।
छोटे फैसले तुरंत लें।
गलत फैसला भी सीख देता है।

7. Social Media कम करें

सोशल मीडिया तुलना और चिंता बढ़ाता है।
दिन में सीमित समय उपयोग करें।

8. Worst Case Scenario सोचें

सबसे बुरा क्या हो सकता है?
क्या आप उसे संभाल सकते हैं?
अक्सर जवाब होता है — “हाँ”।

9. अपने डर का सामना करें

जिन चीजों से डरते हैं, वही ज्यादा सोचते हैं।
धीरे-धीरे उनका सामना करें।

10. “Let it Go” की आदत डालें

हर चीज आपके कंट्रोल में नहीं है।
जो आपके बस में है, वही करें।

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