Sushruta – महर्षि सुश्रुत का विस्तृत जीवन और योगदान ( By :- Raj gupta )

 


🩺 Sushruta – महर्षि सुश्रुत का विस्तृत जीवन और योगदान

महर्षि सुश्रुत प्राचीन भारत के महान आयुर्वेदाचार्य और विश्व के प्रथम शल्य चिकित्सक (Surgeon) माने जाते हैं। उन्होंने लगभग 2600 वर्ष पहले चिकित्सा विज्ञान को व्यवस्थित रूप दिया। आज भी आधुनिक सर्जरी में उनके सिद्धांतों की झलक मिलती है।

🔶 1️⃣ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

महर्षि सुश्रुत का काल लगभग 600 ईसा पूर्व माना जाता है। वे प्राचीन काशी (वर्तमान Varanasi) में रहते थे।

उनके गुरु भगवान धन्वंतरि माने जाते हैं, जिन्हें आयुर्वेद का जनक कहा जाता है। काशी उस समय शिक्षा और चिकित्सा का बड़ा केंद्र था।

📖 2️⃣ प्रमुख ग्रंथ – Sushruta Samhita

सुश्रुत का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ “सुश्रुत संहिता” है। यह आयुर्वेद का एक महत्वपूर्ण और विस्तृत ग्रंथ है, जिसमें चिकित्सा और शल्य विज्ञान का गहन वर्णन मिलता है।

📚 सुश्रुत संहिता के मुख्य भाग:

  1. सूत्रस्थान

  2. निदानस्थान

  3. शरीरस्थान

  4. चिकित्सा स्थान

  5. कल्पस्थान

  6. उत्तरतंत्र

इस ग्रंथ में लगभग:

  • 300 से अधिक शल्य क्रियाओं का वर्णन

  • 120 से अधिक शल्य उपकरणों का विवरण

  • 700 से अधिक औषधीय पौधों का उल्लेख

✂️ 3️⃣ शल्य चिकित्सा (Surgery) में महान योगदान

🔹 (1) प्लास्टिक सर्जरी

सुश्रुत को “Father of Plastic Surgery” कहा जाता है।
उन्होंने नाक के पुनर्निर्माण (Rhinoplasty) की विधि बताई। उस समय अपराधियों की नाक काट दी जाती थी, जिसे वे त्वचा जोड़कर ठीक करते थे।

🔹 (2) मोतियाबिंद का ऑपरेशन

उन्होंने Cataract (मोतियाबिंद) के ऑपरेशन की तकनीक बताई।

🔹 (3) प्रसूति और स्त्री रोग

उन्होंने प्रसव प्रक्रिया और जटिल प्रसव स्थितियों का वर्णन किया।

🔹 (4) हड्डी और फ्रैक्चर

फ्रैक्चर के प्रकार और हड्डी जोड़ने की विधियाँ बताईं।

🔹 (5) घाव और संक्रमण

घावों की सफाई, टांके लगाने और संक्रमण रोकने के उपाय बताए।

🛠️ 4️⃣ शल्य उपकरण (Surgical Instruments)

सुश्रुत ने 120 से अधिक उपकरणों का वर्णन किया।

इनमें शामिल थे:

  • चाकू (Scalpel)

  • सुई (Needle)

  • चिमटी (Forceps)

  • कैंची

  • आरी

उन्होंने उपकरणों को पशु-पक्षियों के अंगों के आकार से प्रेरित होकर बनाया।

🧠 5️⃣ शरीर रचना (Anatomy)

सुश्रुत ने मानव शरीर की संरचना का विस्तार से अध्ययन किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को मृत शरीर (Cadaver) का अध्ययन करने की सलाह दी, जो उस समय एक क्रांतिकारी विचार था।

उन्होंने शरीर में:

  • 300 हड्डियों

  • नसों और धमनियों

  • मांसपेशियों
    का वर्णन किया।

🎓 6️⃣ शिक्षा प्रणाली

महर्षि सुश्रुत की शिक्षा पद्धति अत्यंत व्यवस्थित थी।

✔ पहले सिद्धांत पढ़ाए जाते थे।
✔ फिर फलों और सब्जियों पर अभ्यास कराया जाता था।
✔ अंत में वास्तविक सर्जरी कराई जाती थी।

यह पद्धति आज की मेडिकल शिक्षा से मिलती-जुलती है।

⚖️ 7️⃣ चिकित्सा नैतिकता

सुश्रुत ने चिकित्सकों के लिए आचार संहिता बनाई:

  • रोगी के साथ करुणा रखें

  • स्वच्छता बनाए रखें

  • लालच न करें

  • गोपनीयता बनाए रखें

  • रोगी की भलाई सर्वोपरि रखें

ये सिद्धांत आज भी मेडिकल एथिक्स का आधार हैं।

🌍 8️⃣ विश्व पर प्रभाव

सुश्रुत संहिता का अनुवाद अरबी भाषा में हुआ।
अरब देशों के माध्यम से यह ज्ञान यूरोप पहुँचा।

आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी की कई तकनीकें उनके सिद्धांतों से प्रेरित हैं।

🌟 9️⃣ महर्षि सुश्रुत का महत्व

  • विश्व के प्रथम शल्य चिकित्सक

  • प्लास्टिक सर्जरी के जनक

  • आयुर्वेद के महान विद्वान

  • आधुनिक सर्जरी के आधार स्तंभ

🏆 निष्कर्ष

महर्षि सुश्रुत केवल एक चिकित्सक नहीं थे, बल्कि एक महान वैज्ञानिक, शिक्षक और मानवतावादी थे। उन्होंने यह सिद्ध किया कि प्राचीन भारत में विज्ञान और चिकित्सा अत्यंत उन्नत स्तर पर थे।

उनका ज्ञान आज भी चिकित्सा विज्ञान के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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