( समुद्र के अंदर सबमरीन केबल कैसे बिछाई जाती है – पूरी जानकारी ) -( BY RAJ GUPTA )

 ( समुद्र के अंदर सबमरीन केबल कैसे बिछाई जाती है – पूरी जानकारी ) 


आज के डिजिटल युग में इंटरनेट हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक देश से दूसरे देश तक इंटरनेट कैसे पहुंचता है? इसका सबसे बड़ा माध्यम है सबमरीन केबल (Submarine Cable), जो समुद्र के अंदर बिछाई जाती है। इस पोस्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि समुद्र के अंदर सबमरीन केबल कैसे बिछाई जाती है।

1 सबमरीन केबल क्या होती है?

सबमरीन केबल एक विशेष प्रकार की फाइबर ऑप्टिक केबल होती है, जो समुद्र के अंदर बिछाई जाती है। यह केबल डेटा, इंटरनेट और टेलीफोन सिग्नल को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने का काम करती है।

आज दुनिया का लगभग 95% इंटरनेट डेटा इन्हीं केबल्स के माध्यम से ट्रांसफर होता है।

2 केबल बिछाने की जरूरत क्यों पड़ती है?

  • देशों के बीच तेज इंटरनेट कनेक्शन देने के लिए
  • अंतरराष्ट्रीय कॉल और डेटा ट्रांसफर के लिए
  • सैटेलाइट की तुलना में ज्यादा तेज और सस्ता माध्यम
  • बड़े-बड़े IT और नेटवर्क कंपनियों की जरूरत

3 सबमरीन केबल बिछाने की पूरी प्रक्रिया

अब हम स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं कि समुद्र के अंदर केबल कैसे बिछाई जाती है:

 सर्वे (Survey) और प्लानिंग

सबसे पहले समुद्र के अंदर के रास्ते का सर्वे किया जाता है। इसमें वैज्ञानिक और इंजीनियर समुद्र की गहराई, चट्टानों, समुद्री जीवों और भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन करते हैं।

 इसका उद्देश्य यह होता है कि केबल सुरक्षित और लंबे समय तक टिक सके।

4 केबल डिजाइन और निर्माण

सबमरीन केबल को बहुत मजबूत बनाया जाता है ताकि वह समुद्र के दबाव और खारे पानी को सह सके।

इसमें कई लेयर होती हैं:

  • फाइबर ऑप्टिक कोर (डेटा ट्रांसफर के लिए)
  • स्टील वायर (मजबूती के लिए)
  • प्लास्टिक और इंसुलेशन लेयर (पानी से बचाने के लिए)

5 केबल को जहाज पर लोड करना

केबल को बड़े-बड़े रोल (Drum) में लपेटकर विशेष जहाजों पर रखा जाता है। इन जहाजों को Cable Laying Ships कहा जाता है।

ये जहाज बहुत ही एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस होते हैं।

 समुद्र में केबल बिछाना

अब असली काम शुरू होता है। जहाज धीरे-धीरे समुद्र में आगे बढ़ता है और पीछे से केबल को पानी में छोड़ता जाता है।

 गहरे समुद्र में केबल सीधे समुद्र तल पर रख दी जाती है।
 किनारों के पास (Shallow Water) केबल को जमीन के अंदर दबाया जाता है ताकि वह सुरक्षित रहे।

6 केबल को समुद्र तल में दबाना

जहां पानी कम गहरा होता है, वहां केबल को मशीनों की मदद से समुद्र की मिट्टी के अंदर दबाया जाता है।

इसके लिए खास मशीनों का उपयोग किया जाता है जिसे Plough कहा जाता है।

 इससे केबल मछली पकड़ने के जाल, जहाजों के एंकर आदि से सुरक्षित रहती है।

7 रिपीटर (Repeater) लगाना

लंबी दूरी में सिग्नल कमजोर हो जाता है, इसलिए हर कुछ किलोमीटर पर Repeater लगाए जाते हैं।

 ये सिग्नल को मजबूत बनाते हैं ताकि डेटा बिना रुकावट के पहुंच सके।

8 टेस्टिंग और मेंटेनेंस

केबल बिछाने के बाद उसकी पूरी जांच की जाती है:

  • सिग्नल ठीक आ रहा है या नहीं
  • कहीं कोई नुकसान तो नहीं

इसके बाद समय-समय पर मेंटेनेंस भी किया जाता है।

9 समुद्र के अंदर आने वाली चुनौतियां

सबमरीन केबल बिछाना आसान काम नहीं है। इसमें कई चुनौतियां आती हैं:

  • समुद्र की गहराई और दबाव
  • भूकंप और ज्वालामुखी
  • जहाजों के एंकर से नुकसान
  • मछली पकड़ने वाले जाल
  • समुद्री जीव (कभी-कभी शार्क भी केबल को काट सकती हैं)

10 केबल टूट जाए तो क्या होता है?

अगर केबल टूट जाती है तो इंटरनेट स्पीड धीमी हो सकती है या पूरी तरह बंद भी हो सकता है।

 इसे ठीक करने के लिए:

  • विशेष जहाज भेजे जाते हैं
  • खराब हिस्से को बाहर निकालकर रिपेयर किया जाता है

11 भारत में सबमरीन केबल

भारत भी कई अंतरराष्ट्रीय सबमरीन केबल से जुड़ा हुआ है, जिससे हमें तेज इंटरनेट मिलता है।

मुंबई और चेन्नई जैसे शहर इन केबल्स के मुख्य लैंडिंग पॉइंट हैं।

12 निष्कर्ष

समुद्र के अंदर सबमरीन केबल बिछाना एक बहुत ही जटिल और तकनीकी प्रक्रिया है। यह आधुनिक दुनिया की रीढ़ (Backbone) है, क्योंकि इसके बिना इंटरनेट संभव नहीं होता।

यह केबल्स हमें दुनिया से जोड़ती हैं और डिजिटल क्रांति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


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