महात्मा गांधी की जीवनी
महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी तथा माता का नाम पुतलीबाई था। गांधी जी बचपन से ही सत्य, ईमानदारी और सादगी के गुणों से प्रभावित थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर और राजकोट में हुई।
सन् 1888 में गांधी जी कानून की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड गए। वहाँ से बैरिस्टर बनने के बाद वे भारत लौट आए। कुछ समय बाद वे एक कानूनी मामले के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए। दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने भारतीयों के साथ होने वाले भेदभाव और अन्याय को देखा। वहाँ उन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। इसी दौरान उन्होंने "सत्याग्रह" की नीति अपनाई, जो आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख आधार बनी।
सन् 1915 में गांधी जी भारत लौटे और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लेने लगे। उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम जनता की समस्याओं को समझा और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाई। चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा आंदोलन और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन उनके प्रारंभिक सफल आंदोलनों में शामिल हैं।
महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध कई महत्वपूर्ण आंदोलनों का नेतृत्व किया। सन् 1920 में उन्होंने असहयोग आंदोलन शुरू किया, जिसके माध्यम से लोगों को अंग्रेजी वस्तुओं और संस्थाओं का बहिष्कार करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बाद सन् 1930 में उन्होंने दांडी मार्च और नमक सत्याग्रह का नेतृत्व किया, जिसने पूरे देश में स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया। सन् 1942 में उन्होंने "भारत छोड़ो आंदोलन" शुरू किया और अंग्रेजों से भारत छोड़ने की मांग की।
गांधी जी सत्य, अहिंसा, प्रेम और मानवता के पुजारी थे। वे मानते थे कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं बल्कि शांति और संवाद से किया जा सकता है। उनके विचारों का प्रभाव केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व पर पड़ा। इसी कारण उन्हें "राष्ट्रपिता" के रूप में सम्मान दिया जाता है।
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी जी की हत्या कर दी गई। उनके अंतिम शब्द "हे राम" बताए जाते हैं। यद्यपि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके आदर्श और विचार आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं।
महात्मा गांधी का जीवन सत्य, अहिंसा, त्याग और देशभक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। गांधी जी सदैव भारतीयों के हृदय में अमर रहेंगे।