मकड़ी : पूर्ण जानकारी वाला विस्तृत लेख ( BY ABHISHEK YADAV )

 मकड़ी पृथ्वी के सबसे विविध और अनोखे जीवों में से एक है। अपनी अद्भुत जाल बुनने की क्षमता, आठ पैरों, तेज़ प्रतिक्रिया, अलग-अलग आकार और रंगों के कारण ये जीव विज्ञान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मकड़ियाँ अरैकिनिडा (Arachnida) वर्ग से संबंधित होती हैं और इन्हें कीट (Insects) नहीं माना जाता। दुनिया में 50,000 से अधिक ज्ञात प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो जंगलों से लेकर घरों, खेतों, गुफाओं, पहाड़ों और रेगिस्तानों तक हर जगह फैली हुई हैं।

इस लेख में हम मकड़ी के प्रकार, संरचना, जाल, आहार, प्रजनन, व्यवहार, उपयोगिता, खतरों और रोचक तथ्यों पर विस्तार से जानेंगे।

1. मकड़ी क्या है?

मकड़ी एक आर्थ्रोपोड है, जिसका अर्थ है—ये जीव बाहरी कठोर खोल (Exoskeleton) और खंडित शरीर वाले होते हैं। मकड़ी को कीटों से अलग इसलिए माना जाता है क्योंकि:

  • मकड़ियों के 8 पैर होते हैं, जबकि कीटों के 6।

  • इनके शरीर के 2 मुख्य भाग होते हैं—(1) सेफेलोथोरैक्स, (2) उदर (एब्डॉमेन)।

  • मकड़ियों के पास एंटेना (सूंगने की मूँछ) नहीं होते।

मकड़ी घात लगाकर शिकार करने और जाला बुनने जैसे व्यवहार के कारण जीव विज्ञानी के लिए अत्यंत रोचक प्राणी है।

2. मकड़ी की प्रमुख प्रजातियाँ

दुनिया में हजारों प्रजातियाँ हैं, लेकिन कुछ मुख्य समूह ये हैं:

(1) वेबस्पिनिंग स्पाइडर (जाल बनाने वाली मकड़ी)

  • सबसे प्रसिद्ध प्रकार

  • सुंदर और मजबूत जाल बनाती है

  • उदाहरण: ऑर्ब-वीवर स्पाइडर

(2) टारेंटुला (Tarantula)

  • बड़ी, बालों वाली और ज़मीन पर रहने वाली मकड़ी

  • आमतौर पर इंसानों को नहीं नुकसान पहुँचाती

(3) जम्पिंग स्पाइडर (Jumping Spider)

  • छोटी लेकिन बहुत फुर्तीली

  • कई सेंटीमीटर तक छलांग लगा सकती है

  • दृष्टि अत्यंत तेज़

(4) वुल्फ स्पाइडर (Wolf Spider)

  • बड़े शिकार का पीछा करके पकड़ती है

  • जाल नहीं बनाती

(5) ब्लैक विडो (Black Widow)

  • विषैली प्रजाति

  • मादा नर से बड़ी होती है

  • चमकदार काले शरीर पर लाल निशान होता है

(6) क्रैब स्पाइडर

  • केकड़े जैसी चलती है

  • फूलों में छिपकर शिकार करती है

हर प्रजाति की अपनी अनूठी पहचान, रंग, शरीर का आकार और व्यवहार होता है।

3. मकड़ी की शारीरिक संरचना

मकड़ियाँ आकार और रंग में भिन्न होती हैं, लेकिन उनकी संरचना लगभग समान रहती है।

मुख्य भाग:

  1. सेफेलोथोरैक्स (Cephalothorax): सिर और वक्ष का संयुक्त भाग

  2. अब्डॉमेन (Abdomen): जहाँ से मकड़ी का जाला निकलता है

  3. आठ पैर

  4. 8 आँखें (कुछ में 6)

  5. चेलिसेरी (फैंग): विष डालने के लिए

  6. स्पिनरेट्स: जाला बनाने के लिए उपयोग होने वाले ग्रंथियाँ

विशेष विशेषताएँ:

  • मकड़ियों के पैर में मांसपेशियाँ कम होती हैं; वे शरीर में रक्तचाप बढ़ाकर पैर फैलाती हैं।

  • शरीर पर मुलायम रोम (Hairs) होते हैं जो हवा, कंपन और गंध समझने में मदद करते हैं।

  • इनका जाला स्टील से भी मजबूत हो सकता है (समान मोटाई पर)।

4. मकड़ी कहाँ रहती है?

मकड़ी दुनिया के लगभग हर कोने में पाई जाती है।
ये रहती हैं—

  • जंगल

  • खेत

  • घर की दीवारों और कोनों में

  • गुफाओं में

  • रेगिस्तानों में

  • पहाड़ों और घासभूमि में

  • पेड़ों पर और पानी के पास

कुछ प्रजातियाँ पानी के नीचे बुलबुलों में रह सकती हैं, जैसे—डाइविंग बेल स्पाइडर

5. मकड़ी क्या खाती है?

मकड़ियाँ मांसाहारी (Carnivorous) होती हैं।
इनका भोजन:

  • कीट (मक्खी, मच्छर, तितली)

  • कीड़े

  • छोटे कीटों के लारवा

  • कुछ बड़ी मकड़ियाँ छिपकली या छोटे पक्षियों को भी पकड़ लेती हैं

मकड़ियाँ अपने शिकार को काटकर उसमें हल्का विष डालती हैं, जिससे शिकार का शरीर मुलायम होकर “तरल” जैसा हो जाता है। फिर वे उसी द्रव को पी लेती हैं।

6. जाल कैसे बनाती है मकड़ी?

मकड़ी का जाला उसकी सबसे अद्भुत रचना है।

जाले की विशेषताएँ:

  • रेशम (Silk) से बना होता है

  • रेशम स्पिनरेट्स से निकलता है

  • एक सेकंड में कई सेंटीमीटर लंबा धागा बन सकता है

  • यह धागा मजबूत, लचीला और मौसमरोधी होता है

जाल का उपयोग:

  • शिकार फँसाने के लिए

  • रहने के लिए

  • अंडों की सुरक्षा के लिए

  • खुद को हवा में उछालने के लिए (Ballooning तकनीक)

जाल के प्रकार:

  1. गोलाकार जाला

  2. बिछा हुआ तिकोना जाला

  3. सुरंगनुमा जाला

  4. अनियमित जाला

मकड़ियाँ इंजीनियरिंग जैसी कुशलता से जाल तैयार करती हैं।

7. मकड़ी का प्रजनन और जीवन चक्र

(1) प्रजनन प्रक्रिया

मकड़ी के नर और मादा दोनों अलग-अलग आकार के होते हैं।

  • नर छोटे होते हैं और मादा बड़ी।

  • नर अपने पैरों और शरीर की हरकतों से मादा को आकर्षित करते हैं।

कुछ प्रजातियों में मादा प्रजनन के बाद नर को खा भी सकती है (जैसे ब्लैक विडो)।

(2) अंडों का निर्माण

मादा मकड़ी रेशम से “Egg Sac” या थैली बनाती है, जिसमें सैकड़ों अंडे हो सकते हैं।

(3) स्पाइडरलिंग (बच्चे)

छोटे बच्चे निकलकर कुछ दिनों तक जाले में रहते हैं, फिर हवा में उड़कर नए स्थानों पर फैल जाते हैं।

(4) जीवनकाल

  • सामान्य मकड़ी: 1–2 साल

  • टारेंटुला: 20 साल तक

8. मकड़ी और मानव—रिश्ता

कई लोग मकड़ियों से डरते हैं, लेकिन ये हमारे लिए लाभदायक हैं।

लाभ:

  • कीटों की संख्या नियंत्रित करती हैं

  • मच्छरों को कम करके बीमारियों के खतरे घटाती हैं

  • कृषि में फसल बचाने में मदद

हानि और खतरे:

  • कुछ प्रजातियाँ विषैली होती हैं

  • लेकिन केवल 25–30 प्रजातियाँ ही मनुष्यों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती हैं

अधिकतर मकड़ियाँ मनुष्यों से दूर रहती हैं और हमला तभी करती हैं जब वे खतरा महसूस करती हैं।

9. मकड़ी की विषैली प्रजातियाँ

कुछ प्रमुख विषैली मकड़ियाँ:

  • ब्लैक विडो (Black Widow)

  • ब्राउन रेक्लूस (Brown Recluse)

  • सिडनी फनल-वेब स्पाइडर

  • रेडबैक स्पाइडर

इनका विष आम तौर पर न्यूरोटॉक्सिक होता है, लेकिन समय पर चिकित्सा से ज्यादातर मामलों में इलाज संभव है।

10. मकड़ी के रोचक तथ्य

  • मकड़ियाँ उड़ नहीं सकतीं, लेकिन हवा में धागा छोड़कर “उड़ान” भरती हैं।

  • दुनिया की सबसे बड़ी मकड़ी गोलीयथ बर्ड-ईटर टारेंटुला है।

  • मकड़ी का रेशम बुलेटप्रूफ सामग्री बनाने में शोध के लिए उपयोग होता है।

  • कुछ मकड़ियों की दृष्टि इंसानों से बेहतर होती है।

  • कई मकड़ियाँ पानी पर चल सकती हैं।

11. पर्यावरण में मकड़ी का महत्व

  • पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखती हैं।

  • कीट नियंत्रण में मददगार।

  • कई जीव इन्हें भोजन के रूप में खाते हैं, जैसे — पक्षी, छिपकली, मेंढक।

यदि मकड़ियाँ न हों, तो कीटों की संख्या बहुत बढ़ सकती है जिससे फसलें, जंगल और मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

निष्कर्ष

मकड़ी एक अत्यंत उपयोगी, रोचक और पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण जीव है। अपनी अनोखी बनावट, जाल बनाने की कला, शिकार की तकनीक और विविध प्रजातियों के कारण यह विज्ञान की दुनिया में खास स्थान रखती है। भले ही कुछ लोगों को मकड़ियों से डर लगता हो, लेकिन हकीकत यह है कि वे हमारे लिए अधिक लाभदायक हैं और प्रकृति की पारिस्थितिकी प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा ह

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