ब्रह्मांड (Universe) एक अत्यंत विशाल और रहस्यमयी विस्तार है, जिसकी शुरुआत लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले मानी जाती है। यह कहानी केवल तारों, ग्रहों या आकाशगंगाओं की नहीं, बल्कि स्वयं समय और स्थान (Time & Space) की उत्पत्ति की कहानी है। हर सभ्यता ने अपने-अपने तरीके से ब्रह्मांड और पृथ्वी की उत्पत्ति को समझने का प्रयत्न किया है, लेकिन आधुनिक विज्ञान हमें इस प्रक्रिया का सबसे विश्वसनीय और प्रमाणिक विवरण देता है। इस अध्याय में हम जानेंगे कि ग्रहों का जन्म कैसे हुआ, सौरमंडल कैसे बना, और विशेष रूप से हमारी पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई।
1. ब्रह्मांड की शुरुआत – बिग बैंग सिद्धांत
विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की शुरुआत एक महाविस्फोट से हुई, जिसे हम बिग बैंग कहते हैं। इस विस्फोट में न तो कोई सामान्य बारूद था और न ही यह कोई साधारण धमाका था। यह वास्तव में जगह और समय का विस्तार था, जिसमें ऊर्जा अत्यधिक मात्रा में फैल गई।
शुरुआत में केवल ऊर्जा थी—न प्रकाश, न तारे, न ग्रह। समय के साथ ऊर्जा ने मूल कणों (Elementary Particles) को जन्म दिया:
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क्वार्क
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इलेक्ट्रॉन
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प्रोटॉन
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न्यूट्रॉन
बिग बैंग के कुछ ही मिनटों में हल्के तत्व जैसे हाइड्रोजन और हीलियम बने। ये वही तत्व हैं जिन्होंने आगे चलकर तारों और आकाशगंगाओं को जन्म दिया।
2. तारों का जन्म – नेबुला से नाभिकीय अग्नि तक
ग्रहों की कहानी तारों से शुरू होती है। तारे भी अचानक प्रकट नहीं हुए; उनका निर्माण भी एक लंबी प्रक्रिया से हुआ। ब्रह्मांड में शुरुआती समय में हाइड्रोजन और हीलियम गैस के विशाल बादल मौजूद थे, जिन्हें नेबुला (Nebula) कहा जाता है।
समय के साथ गुरुत्वाकर्षण (Gravity) ने इन गैस बादलों को एक जगह इकट्ठा करना शुरू किया। जैसे-जैसे गैसें सिकुड़कर एक बिंदु पर जमा हुईं, तापमान और दबाव बढ़ने लगे। जब तापमान दस लाख डिग्री सेल्सियस से अधिक हुआ, तब नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) शुरू हुआ और एक तारा जन्मा।
यही प्रक्रिया सौरमंडल के केंद्र में हमारे सूर्य के जन्म का कारण बनी।
3. सौरमंडल की उत्पत्ति – Solar Nebular Hypothesis
लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले अंतरिक्ष में एक विशाल गैसीय बादल था, जिसमें हाइड्रोजन, हीलियम, धूल, बर्फ और चट्टानों के छोटे-छोटे टुकड़े थे। इसे सौर नेबुला कहा जाता है।
3.1 सौर नेबुला का संकुचन
किसी सुपरनोवा विस्फोट (पास के तारे के फटने) से उत्पन्न झटके ने इस नेबुला को हिलाया और वह सिकुड़ने लगा। सिकुड़ते समय नेबुला घूमने लगा और एक डिस्क जैसा आकार बना।
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बीच में सूर्य का निर्माण हुआ।
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डिस्क के बाहरी भाग में धीरे-धीरे ग्रहों, उल्काओं और धूमकेतुओं के बीज तैयार होने लगे।
3.2 ग्रहों का निर्माण – Planetesimal Theory
नेबुला में धूल और गैस के कण परस्पर टकराकर बड़े टुकड़ों में बदलने लगे।
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पहले छोटे-छोटे चट्टानी कण बने
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फिर वे टकराकर प्लैनेटेसिमल बने
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और आगे चलकर ये प्लैनेटेसिमल जुड़कर ग्रहों में विकसित हुए
सूर्य से करीब वाले क्षेत्र गर्म थे, इसलिए वहाँ धातु और चट्टानें बचीं — और इनसे बने स्थलीय ग्रह:
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बुध
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शुक्र
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पृथ्वी
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मंगल
सूर्य से दूर की जगहें ठंडी थीं, इसलिए वहाँ गैस और बर्फ जमा रही — और बने गैसीय दानव ग्रह:
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बृहस्पति
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शनि
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अरुण
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वरुण
4. पृथ्वी की उत्पत्ति – The Birth of Earth
पृथ्वी लगभग 4.54 अरब वर्ष पहले बनी मानी जाती है। इसका निर्माण भी चरणों में समझना आसान है।
4.1 प्रारंभिक पृथ्वी – एक पिघला हुआ गोला
शुरुआती समय में पृथ्वी एक जलता हुआ गोला थी।
मुख्य कारण:
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लगातार टकराते प्लैनेटेसिमल
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रेडियोधर्मी तत्वों का क्षय
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केंद्र की ओर भारी तत्वों का डूबना
इससे पृथ्वी पूरी तरह पिघली हुई थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, सतह ठंडी होकर ठोस बनने लगी।
4.2 पृथ्वी की परतें बनना – Differentiation
जब पृथ्वी पिघली हुई थी, तब तत्वों ने अपनी घनत्व के अनुसार लेयरें बनाई:
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निकेल और लोहे जैसे भारी तत्व नीचे जाकर कोर बने
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मध्यम घनत्व वाले सिलीकेट से मैंटल बना
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सबसे हल्की सामग्री से पृथ्वी की पर्पटी (Crust) बनी
यह वही संरचना है जो आज तक बनी हुई है।
5. चंद्रमा की उत्पत्ति – The Giant Impact Hypothesis
पृथ्वी के इतिहास में एक बड़ी घटना हुई—थीया (Theia) नामक मंगल आकार का एक पिंड पृथ्वी से टकरा गया।
इस टकराव में:
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पृथ्वी का एक हिस्सा अंतरिक्ष में उछल गया
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थीया के मलबे और पृथ्वी के टुकड़ों ने मिलकर चंद्रमा का निर्माण किया
यह सिद्धांत आज सबसे स्वीकृत माना जाता है।
चंद्रमा का महत्व
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पृथ्वी के घूमने की गति स्थिर करता है
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ज्वार-भाटा बनाता है
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मौसम और पृथ्वी की धुरी को स्थिर रखता है
बिना चंद्रमा पृथ्वी का वातावरण और जीवन बिल्कुल अलग होता।
6. वायुमंडल का निर्माण – The Early Atmosphere
शुरुआती पृथ्वी पर कोई वायुमंडल नहीं था।
वायुमंडल दो कारणों से बना:
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ज्वालामुखियों से निकलने वाली गैसें
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धूमकेतुओं द्वारा लाई गई बर्फ और गैस
पहला वायुमंडल विषैला था जिसमें थी:
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कार्बन डाइऑक्साइड
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नाइट्रोजन
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सल्फर गैसें
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मीथेन
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भाप
ऑक्सीजन लगभग नहीं थी।
7. जल और महासागरों का निर्माण
लगातार ज्वालामुखी गैसों में मौजूद भाप वातावरण में उठती रही।
जब पृथ्वी ठंडी होने लगी, तो भाप बादलों में बदलकर बरसने लगी।
हजारों वर्षों तक वर्षा होती रही और पृथ्वी पर पहले महासागर बने।
धूमकेतु भी बहुत-सी बर्फ लाए जिससे जल की मात्रा और बढ़ी।
8. पृथ्वी को रहने योग्य बनना – The Great Oxidation Event
लगभग 3.5 अरब वर्ष पहले एककोशिकीय जीव (Cyanobacteria) ने प्रकाश संश्लेषण शुरू किया।
वे पानी और सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते थे और इसके उप-उत्पाद के रूप में ऑक्सीजन छोड़ते थे।
धीरे-धीरे ऑक्सीजन वातावरण में जमा होने लगी।
यह घटना पृथ्वी के लिए एक मोड़ थी, क्योंकि ऑक्सीजन ने:
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ओज़ोन परत बनाई
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हानिकारक किरणों को रोका
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जटिल जीवन को संभव बनाया
9. ग्रहों के बनने की आधुनिक समझ
आज वैज्ञानिक नई सौर प्रणालियों को बनते हुए देख सकते हैं। Hubble, James Webb और अन्य टेलीस्कोपों से हमें यह पता चला है कि ग्रह बनने की प्रक्रिया ब्रह्मांड में सामान्य है।
आज भी लाखों नई तारकीय प्रणालियाँ बन रही हैं, और लगभग हर तारे के साथ ग्रह पाए जाते हैं।
9(10. पृथ्वी क्यों खास है?
ब्रह्मांड में अरबों ग्रह हैं, मगर पृथ्वी कुछ कारणों से अद्वितीय है:
10.1 गोल्डीलॉक्स ज़ोन
सूर्य से सही दूरी — न बहुत गर्म, न बहुत ठंडी
जहाँ पानी तरल रूप में रह सकता है।
10.2 संरक्षक ग्रह
बृहस्पति जैसे ग्रह बड़े हैं और कई उल्काओं को अपनी ओर खींच लेते हैं जिससे पृथ्वी सुरक्षित रहती है।
10.3 चंद्रमा
पृथ्वी की धुरी को स्थिर रखता है जिससे मौसम स्थिर रहते हैं।
10.4 चुंबकीय क्षेत्र
पृथ्वी का लोहा-निकल कोर एक शक्तिशाली चुंबकीय ढाल बनाता है, जो सूर्य की घातक सौर हवाओं को रोके रखता है।
10.5 ऑक्सीजन और जल
ये दोनों जीवन के लिए अनिवार्य हैं।
निष्कर्ष
ग्रहों और पृथ्वी की उत्पत्ति कोई एक घटना नहीं, बल्कि अरबों वर्षों की निरंतर प्राकृतिक प्रक्रियाओं का परिणाम है।
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बिग बैंग ने ब्रह्मांड को जन्म दिया
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नेबुला से तारे बने
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तारे के आसपास की डिस्क से ग्रह बने
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पृथ्वी धीरे-धीरे एक पिघले हुए गोले से ठंडा होकर जीवन योग्य ग्रह में बदल गई
आज हम जिस पृथ्वी पर जीवन का आनंद लेते हैं, वह करोड़ों टक्करों, विस्फोटों, ज्वालामुखियों, वर्षाओं और जैविक प्रक्रियाओं का परिणाम है। यह पूरी कथा हमें यह भी याद दिलाती है कि पृथ्वी अत्यंत अद्वितीय और कीमती है—और इसे सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है।
[By Anchal jaiswal]
