मोमबत्ती की लौ टेढ़ी क्यों होती है? BY ARCHANA YADAV

 

मोमबत्ती हमारे दैनिक जीवन की एक बहुत ही साधारण लेकिन महत्वपूर्ण वस्तु है। बिजली चली जाए तो रोशनी के लिए, पूजा-पाठ में, त्योहारों में, जन्मदिन के केक पर या सजावट के लिए—हर जगह मोमबत्ती का उपयोग होता है। देखने में यह बहुत सरल लगती है, परंतु इसके जलने की प्रक्रिया के पीछे गहरा विज्ञान छिपा होता है।

अक्सर हम देखते हैं कि जब मोमबत्ती जलती है तो उसकी लौ (ज्वाला) कभी सीधी ऊपर उठती है और कभी एक ओर झुकी हुई या टेढ़ी दिखाई देती है। यह प्रश्न स्वाभाविक है कि लौ टेढ़ी क्यों हो जाती है? क्या आग का आकार बदल सकता है? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण है?

इस विस्तृत निबंध में हम समझेंगे:

  • मोमबत्ती कैसे काम करती है

  • लौ कैसे बनती है

  • लौ का आकार कैसा होता है

  • लौ टेढ़ी क्यों होती है

  • कौन-कौन से वैज्ञानिक सिद्धांत इसमें काम करते हैं

🕯️ मोमबत्ती की संरचना और कार्यप्रणाली



मोमबत्ती मुख्य रूप से तीन भागों से बनी होती है:

1️⃣ मोम (Wax)

यह ईंधन का कार्य करता है। जब मोम पिघलता है और गैस में बदलता है, तब वही जलकर प्रकाश और ऊष्मा देता है।

2️⃣ बाती (Wick)

यह सूती धागे से बनी होती है। इसका काम पिघले हुए मोम को ऊपर तक पहुँचाना है।

3️⃣ लौ (Flame)

यह जलते हुए मोम की गैस है जो प्रकाश और गर्मी देती है।

🔥 मोमबत्ती जलने की प्रक्रिया

जब हम माचिस से बाती को जलाते हैं:

  1. बाती गर्म होती है।

  2. आसपास का मोम पिघलता है।

  3. पिघला हुआ मोम तरल बनता है।

  4. तरल मोम बाती के सहारे ऊपर चढ़ता है।

  5. ऊपर पहुँचकर वह गैस में बदलता है।

  6. गैस ऑक्सीजन से मिलकर जलती है।

यही प्रक्रिया लगातार चलती रहती है।

🔬 लौ का आकार कैसा होता है?

शांत वातावरण में लौ सामान्यतः ऊपर की ओर नुकीली और सीधी होती है। इसका कारण है:

  • गर्म हवा हल्की होती है

  • हल्की हवा ऊपर उठती है

  • इसलिए लौ ऊपर की ओर खिंचती है

लेकिन यह स्थिति तभी रहती है जब वातावरण संतुलित हो।

🌬️ अब मुख्य प्रश्न: लौ टेढ़ी क्यों होती है?

अब हम विस्तार से समझते हैं कि किन कारणों से मोमबत्ती की लौ टेढ़ी हो जाती है।

1️⃣ हवा का बहाव (सबसे मुख्य कारण)



यदि कमरे में:

  • पंखा चल रहा हो

  • खिड़की खुली हो

  • दरवाज़ा खुला हो

  • या हल्की हवा भी चल रही हो

तो हवा लौ को एक दिशा में धकेल देती है।

लौ हमेशा ऑक्सीजन की दिशा में झुकती है।
जब हवा एक ओर से आती है, तो ऑक्सीजन का प्रवाह असमान हो जाता है।

👉 परिणाम: लौ हवा की विपरीत दिशा में टेढ़ी दिखाई देती है।

2️⃣ संवहन (Convection)

जब मोमबत्ती जलती है तो गर्म हवा ऊपर उठती है। इसे संवहन कहते हैं।

अगर आसपास की ठंडी हवा किसी एक दिशा से अधिक मात्रा में आ रही हो, तो संतुलन बिगड़ जाता है।

इससे लौ का आकार बदल जाता है और वह झुक जाती है।

3️⃣ बाती का झुकना

कभी-कभी बाती सीधी नहीं रहती।

यदि बाती:

  • एक ओर मुड़ जाए

  • बहुत लंबी हो

  • ठीक से कटी न हो

तो लौ भी उसी दिशा में झुक जाती है।

क्योंकि लौ हमेशा बाती के ऊपरी हिस्से पर बनती है।

4️⃣ ऑक्सीजन की असमान उपलब्धता

लौ को जलने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

यदि मोमबत्ती:

  • किसी कोने में रखी हो

  • काँच के जार में हो

  • दीवार के पास हो

तो ऑक्सीजन एक दिशा से अधिक आती है।

👉 इससे लौ उसी दिशा की ओर झुक जाती है।

5️⃣ वायु दाब (Air Pressure)

वातावरण में वायु दाब समान न हो तो भी लौ का आकार बदल सकता है।
हल्का सा दाब अंतर भी लौ को मोड़ सकता है।

🌎 गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव

पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण के कारण गर्म हवा ऊपर उठती है।

यदि अंतरिक्ष में (जहाँ गुरुत्वाकर्षण नहीं होता) मोमबत्ती जलाई जाए, तो लौ गोल आकार की हो जाती है और ऊपर नहीं जाती।

इससे पता चलता है कि लौ का आकार वातावरण और गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है।

 घर पर प्रयोग

प्रयोग 1

एक मोमबत्ती शांत कमरे में जलाएँ।
आप देखेंगे कि लौ लगभग सीधी होगी।

प्रयोग 2

अब उसी मोमबत्ती को पंखे के नीचे जलाएँ।
आप देखेंगे कि लौ एक दिशा में झुक जाएगी।

📚 वैज्ञानिक सिद्धांत

मोमबत्ती की लौ के टेढ़े होने में ये सिद्धांत काम करते हैं:

  • दहन (Combustion)

  • संवहन (Convection)

  • वायु प्रवाह (Air Flow)

  • ऑक्सीजन वितरण

  • गुरुत्वाकर्षण

जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो लौ टेढ़ी हो जाती है।

निष्कर्ष

मोमबत्ती की लौ टेढ़ी होने का मुख्य कारण है:

👉 हवा का बहाव और ऑक्सीजन की असमान आपूर्ति।

यदि वातावरण शांत हो और हवा न चले, तो लौ सीधी रहती है।
जैसे ही हवा चलती है या वायु दाब बदलता है, लौ झुक जाती है।

 अंतिम विचार

मोमबत्ती की छोटी-सी लौ हमें यह सिखाती है कि प्रकृति की हर छोटी चीज भी विज्ञान के नियमों से संचालित होती है।

एक साधारण-सी मोमबत्ती में भी दहन, संवहन, वायु दाब, गुरुत्वाकर्षण और ऊर्जा परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत छिपे होते हैं।

इसलिए अगली बार जब आप मोमबत्ती की लौ को टेढ़ा देखें, तो समझ जाइए कि वह हवा और विज्ञान के नियमों के कारण ऐसा कर रही है।

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