स्पेस स्टेशन पृथ्वी पर क्यों नहीं गिरता? – BY ARCHANA YADAV


जब हम रात के आसमान की ओर देखते हैं और सुनते हैं कि एक विशाल “स्पेस स्टेशन” पृथ्वी के ऊपर घूम रहा है, तो मन में सबसे पहला सवाल आता है —

अगर गुरुत्वाकर्षण (Gravity) हर चीज़ को नीचे खींचता है, तो स्पेस स्टेशन गिरता क्यों नहीं?

क्या अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता?
क्या कोई अदृश्य सहारा उसे पकड़े हुए है?
या फिर यह कोई वैज्ञानिक रहस्य है?

इस ब्लॉग में हम इसी रहस्य को पूरी गहराई से समझेंगे — विज्ञान, गणित और अंतरिक्ष तकनीक के साथ।

 सबसे पहले – स्पेस स्टेशन है क्या?

दुनिया का सबसे प्रसिद्ध स्पेस स्टेशन है:
International Space Station (ISS)

यह एक विशाल प्रयोगशाला है जो पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर “लो अर्थ ऑर्बिट” में घूम रही है।

इसे कई देशों ने मिलकर बनाया है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • NASA

  • Roscosmos

  • ESA

इसका वजन लगभग 420 टन है — यानी कई हाथियों जितना भारी!

फिर भी यह पृथ्वी पर नहीं गिरता। क्यों?

 भ्रम नंबर 1: “अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता”

यह सबसे बड़ा मिथक है।

सच यह है कि अंतरिक्ष में भी गुरुत्वाकर्षण होता है।

पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण 400 किमी ऊँचाई पर भी लगभग 90% तक मौजूद रहता है।

तो अगर गुरुत्व है, तो ISS नीचे क्यों नहीं गिरता?

असली रहस्य – “लगातार गिरना”

अब आता है असली विज्ञान।

स्पेस स्टेशन असल में गिर ही रहा है —
लेकिन वह पृथ्वी के चारों ओर गिर रहा है।

यह सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन यही सच्चाई है।

 ऑर्बिट (Orbit) क्या है?

जब कोई वस्तु बहुत तेज गति से आगे बढ़ती है और साथ ही गुरुत्वाकर्षण उसे नीचे खींचता है, तो वह सीधे गिरने के बजाय गोल-गोल घूमने लगती है।

इसे ही “कक्षा” या Orbit कहते हैं।

ISS लगभग 28,000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पृथ्वी के चारों ओर घूमता है।

इतनी तेज गति से आगे बढ़ते हुए वह नीचे गिरता है —
लेकिन पृथ्वी की सतह भी गोल है और नीचे की ओर मुड़ी हुई है।

इसलिए वह कभी जमीन से टकराता नहीं।

 एक आसान उदाहरण

कल्पना कीजिए आप एक गेंद को सीधा नीचे गिराते हैं — वह जमीन पर गिरती है।

अब कल्पना करें कि आप गेंद को बहुत तेज़ क्षैतिज दिशा में फेंकते हैं।

अगर गति कम होगी तो वह थोड़ी दूर जाकर गिरेगी।
लेकिन अगर गति बहुत ज्यादा हो जाए — तो वह गिरते-गिरते पृथ्वी के चारों ओर घूमने लगेगी।

यही स्पेस स्टेशन के साथ हो रहा है।

 “ज़ीरो ग्रेविटी” का सच

ISS के अंदर अंतरिक्ष यात्री तैरते क्यों हैं?

क्या वहाँ गुरुत्वाकर्षण खत्म हो जाता है?

नहीं।

असल में ISS और उसके अंदर मौजूद लोग एक साथ गिर रहे होते हैं।

जब सब कुछ समान गति से गिरता है, तो अंदर के लोगों को “वजनहीनता” महसूस होती है।

इसे माइक्रोग्रैविटी कहते हैं।

 अगर स्पेस स्टेशन धीमा हो जाए तो?

यहाँ आता है सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा।

अगर ISS की गति कम हो जाए —
तो गुरुत्वाकर्षण उसे धीरे-धीरे नीचे खींच लेगा।

वास्तव में, पृथ्वी का ऊपरी वायुमंडल (Atmosphere) थोड़ा-बहुत घर्षण पैदा करता है, जिससे ISS की गति धीरे-धीरे कम होती रहती है।

इसलिए समय-समय पर रॉकेट उसे “बूस्ट” देते हैं ताकि वह फिर से तेज हो जाए और अपनी कक्षा में बना रहे।

 स्पेस स्टेशन को कौन नियंत्रित करता है?

मुख्य रूप से
NASA
और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार।

वे कंप्यूटर सिस्टम से उसकी गति, ऊँचाई और दिशा को मॉनिटर करते हैं।

 क्या कभी स्पेस स्टेशन गिरेगा?

हाँ।

हर ऑर्बिटिंग वस्तु अंततः वायुमंडल में प्रवेश करती है और जल जाती है।

ISS को भी भविष्य में नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में गिराया जाएगा, ताकि वह सुरक्षित रूप से समुद्र में नष्ट हो जाए।

 विज्ञान बनाम भ्रम

भ्रमसच्चाई
अंतरिक्ष में गुरुत्व नहीं होतागुरुत्व होता है
स्पेस स्टेशन हवा में “टंगा” हैवह लगातार गिर रहा है
कोई अदृश्य सहारा हैकेवल गति और गुरुत्व संतुलन

 असली रहस्य क्या है?

स्पेस स्टेशन का रहस्य जादू नहीं —
बल्कि न्यूटन के नियम हैं।

  1. गति

  2. गुरुत्वाकर्षण

  3. संतुलन

जब ये तीनों सही अनुपात में होते हैं —
तो एक 400 टन का स्टेशन भी पृथ्वी पर नहीं गिरता।

 भविष्य में क्या होगा?

भविष्य में और बड़े स्पेस स्टेशन बनेंगे।

चंद्रमा के पास स्टेशन बनाने की योजना पर काम चल रहा है।

मानवता धीरे-धीरे अंतरिक्ष में स्थायी उपस्थिति की ओर बढ़ रही है।

निष्कर्ष

स्पेस स्टेशन इसलिए नहीं गिरता क्योंकि:

✔️ वह बहुत तेज गति से आगे बढ़ रहा है
✔️ गुरुत्व उसे नीचे खींच रहा है
✔️ पृथ्वी गोल है
✔️ वह लगातार पृथ्वी के चारों ओर गिर रहा है

यह विज्ञान का अद्भुत संतुलन है।

जो चीज हमें रहस्य लगती है, वह असल में गणित और भौतिकी का कमाल है।

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