भारत में ब्रिटिशों का आगमन और शासन – विस्तृत विवरण
प्रस्तावना
ब्रिटिश भारत में सीधे शासक बनकर नहीं आए थे। वे पहले व्यापारी के रूप में आए और धीरे-धीरे राजनीतिक सत्ता पर कब्ज़ा करते गए। लगभग 200 वर्षों तक उन्होंने भारत पर शासन किया। यह प्रक्रिया अचानक नहीं हुई, बल्कि कई युद्धों, नीतियों, षड्यंत्रों और राजनीतिक चालों के माध्यम से पूरी हुई।
1. यूरोपीय शक्तियों का भारत आगमन
15वीं और 16वीं शताब्दी में यूरोप के देशों को एशिया के मसालों, रेशम, कपास और अन्य वस्तुओं की बहुत मांग थी। भारत उस समय व्यापार और धन-संपत्ति के लिए प्रसिद्ध था।
सबसे पहले 1498 में वास्को-द-गामा (पुर्तगाली) भारत के कालीकट (केरल) पहुँचा। इसके बाद पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी और अंग्रेज भारत आए।
ब्रिटेन ने 31 दिसंबर 1600 को ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की। इस कंपनी को महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम ने भारत में व्यापार करने की अनुमति दी।
2. ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत में प्रवेश (1608–1700)
1608 में अंग्रेजों का पहला जहाज सूरत बंदरगाह पहुँचा। 1615 में सर थॉमस रो मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार में गए और व्यापार की अनुमति प्राप्त की।
धीरे-धीरे अंग्रेजों ने विभिन्न स्थानों पर अपने व्यापारिक केंद्र (फैक्ट्रियाँ) स्थापित किए:
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सूरत
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मद्रास (फोर्ट सेंट जॉर्ज)
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बंबई (जो पुर्तगालियों से मिली)
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कलकत्ता (फोर्ट विलियम)
शुरुआत में अंग्रेज केवल व्यापार करते थे, लेकिन उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए सेना भी रखनी शुरू कर दी।
3. मुगल साम्राज्य का पतन और अंग्रेजों का अवसर
1707 में औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य कमजोर होने लगा। भारत कई छोटे-छोटे राज्यों में बँट गया। नवाब और राजा स्वतंत्र रूप से शासन करने लगे।
इस राजनीतिक अस्थिरता का लाभ अंग्रेजों ने उठाया। उन्होंने भारतीय शासकों के बीच आपसी फूट और संघर्ष का फायदा उठाया।
4. प्लासी का युद्ध (1757)
1757 में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और अंग्रेजों के बीच प्लासी का युद्ध हुआ। अंग्रेजों का नेतृत्व रॉबर्ट क्लाइव कर रहा था।
अंग्रेजों ने षड्यंत्र करके नवाब के सेनापति मीर जाफर को अपने पक्ष में कर लिया। युद्ध में सिराजुद्दौला हार गया।
यह युद्ध बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि:
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अंग्रेजों को बंगाल पर नियंत्रण मिला।
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भारत में अंग्रेजों की राजनीतिक सत्ता की शुरुआत हुई।
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बंगाल की अपार संपत्ति अंग्रेजों के हाथ लगी।
5. बक्सर का युद्ध (1764)
1764 में बक्सर का युद्ध हुआ। इसमें अंग्रेजों का सामना हुआ:
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बंगाल के नवाब मीर कासिम
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अवध के नवाब शुजाउद्दौला
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मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय
अंग्रेजों की जीत हुई। इसके बाद 1765 में उन्हें बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी (राजस्व वसूली का अधिकार) मिल गई।
अब अंग्रेज केवल व्यापारी नहीं रहे; वे प्रशासन और कर वसूली भी करने लगे।
6. अंग्रेजों की विस्तार नीति
अंग्रेजों ने पूरे भारत पर कब्जा करने के लिए कई नीतियाँ अपनाईं:
(1) सहायक संधि (Subsidiary Alliance)
लॉर्ड वेलेजली ने यह नीति अपनाई। इसके अनुसार:
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भारतीय राजा अंग्रेजी सेना रखेंगे।
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सेना का खर्च राजा देगा।
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बिना अंग्रेजों की अनुमति कोई संधि नहीं करेगा।
इससे कई राज्य अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गए।
(2) लैप्स की नीति (Doctrine of Lapse)
लॉर्ड डलहौजी ने यह नीति लागू की। यदि किसी राजा का सगा पुत्र नहीं होता, तो उसका राज्य अंग्रेजों में मिला दिया जाता।
इस नीति से झाँसी, नागपुर, सतारा आदि राज्य अंग्रेजों ने हड़प लिए।
(3) युद्धों के माध्यम से विस्तार
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मैसूर युद्ध (टीपू सुल्तान पर विजय)
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मराठा युद्ध
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सिख युद्ध
इन युद्धों के बाद अंग्रेजों ने दक्षिण, पश्चिम और उत्तर भारत पर भी कब्ज़ा कर लिया।
7. अंग्रेजी शासन की आर्थिक नीति
अंग्रेजों की नीतियों से भारत की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ।
(1) कर प्रणाली
किसानों से भारी कर वसूले गए।
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स्थायी बंदोबस्त
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रैयतवाड़ी व्यवस्था
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महालवाड़ी व्यवस्था
इनसे किसानों की स्थिति खराब हो गई।
(2) उद्योगों का विनाश
भारत के कपड़ा उद्योग को नुकसान पहुँचाया गया।
ब्रिटेन से मशीनों से बने सस्ते कपड़े भारत में बेचे गए।
भारतीय कारीगर बेरोजगार हो गए।
(3) धन का निर्यात
भारत से कच्चा माल ब्रिटेन भेजा जाता था और तैयार माल भारत में बेचा जाता था। इसे "धन की निकासी" (Drain of Wealth) कहा गया।
8. सामाजिक और प्रशासनिक बदलाव
अंग्रेजों ने कुछ सुधार भी किए:
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रेल, डाक और तार प्रणाली
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आधुनिक शिक्षा
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अंग्रेजी भाषा का प्रसार
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कानून व्यवस्था की नई प्रणाली
लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य अपने शासन को मजबूत करना था।
9. 1857 का विद्रोह (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम)
1857 में भारतीय सैनिकों ने विद्रोह कर दिया। कारण थे:
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कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी की अफवाह
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धार्मिक हस्तक्षेप
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लैप्स की नीति
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अत्याचारपूर्ण शासन
मुख्य नेता:
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मंगल पांडे
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रानी लक्ष्मीबाई
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तात्या टोपे
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बहादुर शाह ज़फर
यह विद्रोह असफल रहा, लेकिन इसने अंग्रेजों को हिला दिया।
10. 1858 के बाद – ब्रिटिश राज
1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया।
भारत सीधे ब्रिटिश सरकार के अधीन आ गया।
ब्रिटिश संसद भारत के लिए कानून बनाने लगी।
वायसराय भारत का प्रमुख शासक बना।
11. राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत
1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई।
प्रमुख नेता:
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दादाभाई नौरोजी
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बाल गंगाधर तिलक
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लाला लाजपत राय
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बिपिन चंद्र पाल
बाद में महात्मा गांधी के नेतृत्व में आंदोलन तेज हुआ:
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असहयोग आंदोलन
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नमक सत्याग्रह
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भारत छोड़ो आंदोलन
12. स्वतंत्रता और विभाजन
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन कमजोर हो गया।
भारत में आंदोलन तेज हो गया।
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
लेकिन देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना।
