प्रस्तावना
रोमन सभ्यता विश्व इतिहास की सबसे प्रभावशाली और व्यापक सभ्यताओं में से एक थी। इसका आरंभ लगभग 753 ईसा पूर्व में हुआ और धीरे-धीरे यह एक छोटे नगर-राज्य से विशाल साम्राज्य में परिवर्तित हो गई। अपने चरम पर रोमन साम्राज्य यूरोप, पश्चिमी एशिया और उत्तरी अफ्रीका तक फैला हुआ था।
रोमन सभ्यता ने कानून, प्रशासन, सैन्य संगठन, वास्तुकला, भाषा, साहित्य और धर्म के क्षेत्र में गहरा प्रभाव डाला। आधुनिक यूरोप और पश्चिमी दुनिया की अनेक व्यवस्थाएँ रोमन परंपराओं पर आधारित हैं।
स्थापना और प्रारंभिक काल
रोमन परंपरा के अनुसार, रोम नगर की स्थापना 753 ईसा पूर्व में हुई। प्रारंभ में यहाँ राजतंत्र था। पहले सात राजाओं ने रोम पर शासन किया।
509 ईसा पूर्व में अंतिम राजा को हटाकर गणतंत्र (Republic) की स्थापना की गई। इसके बाद रोम में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों और सीनेट के माध्यम से शासन चलने लगा।
रोमन गणतंत्र (509–27 ईसा पूर्व)
गणतंत्र काल रोमन इतिहास का महत्वपूर्ण चरण था।
राजनीतिक संरचना
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सीनेट (Senate) – प्रभावशाली कुलीन वर्ग का प्रतिनिधित्व।
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कौंसल (Consuls) – दो उच्च अधिकारी, एक वर्ष के लिए चुने जाते थे।
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ट्रिब्यून (Tribunes) – सामान्य जनता के हितों की रक्षा करते थे।
सामाजिक वर्ग
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पैट्रीशियन – उच्च वर्ग
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प्लेबियन – सामान्य जनता
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दास – युद्धबंदी और श्रमिक
गणतंत्र काल में रोम ने इटली के अधिकांश भाग पर नियंत्रण स्थापित किया और बाद में कार्थेज के साथ प्यूनीक युद्ध लड़े।
प्यूनीक युद्ध
रोम और कार्थेज के बीच तीन प्रमुख युद्ध हुए। इन युद्धों के बाद रोम भूमध्यसागर का प्रमुख शक्ति बन गया।
विशेषकर तीसरे प्यूनीक युद्ध के बाद कार्थेज का पूर्ण विनाश हुआ और रोम का प्रभुत्व स्थापित हो गया।
जूलियस सीज़र और सत्ता परिवर्तन
पहली शताब्दी ईसा पूर्व में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी।
जूलियस सीज़र ने अपनी सैन्य सफलताओं के बल पर अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त की। 44 ईसा पूर्व में उनकी हत्या कर दी गई।
इसके बाद गृहयुद्ध हुआ और अंततः ऑक्टेवियन (ऑगस्टस) विजयी हुआ।
रोमन साम्राज्य (27 ईसा पूर्व – 476 ईस्वी)
27 ईसा पूर्व में ऑक्टेवियन को “ऑगस्टस” की उपाधि मिली और रोमन साम्राज्य की शुरुआत हुई।
स्वर्णकाल (Pax Romana)
ऑगस्टस के शासन में शांति और स्थिरता का युग आया, जिसे Pax Romana कहा जाता है।
इस काल में:
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व्यापार का विस्तार
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सड़क निर्माण
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प्रशासनिक सुधार
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कला और साहित्य का विकास
प्रशासन और कानून
रोमन कानून आज भी कई देशों की न्याय व्यवस्था का आधार है।
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“बारह पट्टिकाएँ” (Twelve Tables)
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नागरिकता की अवधारणा
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न्याय और समानता पर आधारित विधि प्रणाली
रोमन साम्राज्य को प्रांतों में बाँटा गया था, जहाँ गवर्नर शासन चलाते थे।
सैन्य शक्ति
रोमन सेना अत्यंत संगठित और अनुशासित थी।
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सेना को “लीजन” में बाँटा गया था।
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सैनिकों को कठोर प्रशिक्षण दिया जाता था।
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उन्नत हथियार और रणनीति का प्रयोग किया जाता था।
रोमन सेना ने साम्राज्य के विस्तार और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आर्थिक जीवन
कृषि
अर्थव्यवस्था का आधार कृषि था। गेहूँ, जैतून और अंगूर प्रमुख फसलें थीं।
व्यापार
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भूमध्यसागर व्यापार का केंद्र था।
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सोना, चांदी, मसाले, रेशम का आयात-निर्यात होता था।
दास प्रथा
अर्थव्यवस्था में दासों की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
सामाजिक जीवन
रोमन समाज में परिवार को विशेष महत्व था।
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पिता परिवार का प्रमुख होता था।
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महिलाओं को सीमित अधिकार थे, परंतु समय के साथ स्थिति में सुधार हुआ।
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मनोरंजन के लिए कोलोसियम में ग्लैडिएटर युद्ध और रथ दौड़ आयोजित होती थीं।
धर्म
प्रारंभ में रोमन लोग बहुदेववादी थे।
प्रमुख देवता:
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जुपिटर
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मार्स
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वीनस
बाद में ईसाई धर्म का प्रसार हुआ।
ईसाई धर्म को 4वीं शताब्दी में आधिकारिक मान्यता मिली।
वास्तुकला और इंजीनियरिंग
रोमन वास्तुकला अत्यंत उन्नत थी।
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मेहराब (Arch) का प्रयोग
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जलसेतु (Aqueduct)
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सड़कें और पुल
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एम्फीथिएटर
कंक्रीट का व्यापक उपयोग उनकी विशेष उपलब्धि थी।
साहित्य और कला
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वर्जिल (Virgil) – एनीड (Aeneid)
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ओविड (Ovid)
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सिसेरो (Cicero)
मूर्तिकला और चित्रकला में यथार्थवाद झलकता है।
पतन के कारण
476 ईस्वी में पश्चिमी रोमन साम्राज्य का पतन हुआ।
मुख्य कारण:
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आंतरिक भ्रष्टाचार
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आर्थिक संकट
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बर्बर आक्रमण
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विशाल साम्राज्य का नियंत्रण कठिन होना
हालाँकि पूर्वी रोमन साम्राज्य (बीजान्टिन साम्राज्य) लंबे समय तक अस्तित्व में रहा।
योगदान और महत्व
रोमन सभ्यता के प्रमुख योगदान:
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आधुनिक कानून प्रणाली
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गणराज्य की अवधारणा
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वास्तुकला और इंजीनियरिंग
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लैटिन भाषा (जिससे फ्रेंच, स्पेनिश, इटालियन आदि विकसित हुईं)
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प्रशासनिक ढाँचा